बिहार में संगठन को मजबूत बनाने के लिए जनता दल युनाइटेड ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजीव रंजन उर्फ ललन सिंह और प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने खुद इसकी कमान उठा रखी है। पार्टी ने संगठन को मजबूत बनाने के लिए जिला अध्यक्षों को महत्वपूर्ण भूमिका में रखा है।

इनको यह जिम्मेदारी दी गई है कि वो प्रदेश के हर जिले के प्रत्येक गांव में दस-दस सक्रिय सदस्य बनाएं और उसकी पूरी जानकारी जिसमें मोबाइल नंबर से लेकर पूरा पता तक, पटना स्थित जेडीयू दफ्तर को देना होगा।

उमेश कुशवाहा ने कहा कि पूरी जानकारी जब जेडीयू दफ्तर में आ जाएगी तो उसे डिजिटली अपलोड कर दिया जाएगा. फिर पार्टी दफ्तर से जो पूरी टीम बनाई गई है वो टीम कभी भी, किसी भी वक्त जो सदस्य की जानकारी पार्टी दफ्तर को जिला अध्यक्ष के तरफ से दी गई है उसको क्रॉस चेक किया जाएगा की जो जानकारी जेडीयू की सदस्यता की दी गई है वो सही है या गलत।

वहीं, जेडीयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष ललन सिंह इस कदम की वजह बताते हुए कहते हैं कि ऐसा करने के पीछे मकसद साफ है कि जो गलतियां पहले हुई हैं, वो दोबारा ना हो। जो भी सदस्य जेडीयू से जुड़े हैं वो सही मायने में पार्टी से जुड़े हैं या नहीं इसकी जानकारी तो होनी चाहिए। इसके पहले ऐसी गलती हो चुकी है जिसकी वजह से पिछले विधानसभा चुनाव में जेडीयू को काफी नुकसान पहुंचा था।

आने वाले समय में लोकसभा चुनाव और बिहार विधानसभा चुनाव होगा उसके पहले जेडीयू, संगठन के मामले में इतना मजबूत हो जाए कि चुनाव में इसका फायदा पार्टी को मिल सके।

जेडीयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा ने उम्मीद जताते हुे कहा कि बिहार के लगभग 45 हजार गांव हैं, इनमें से यदि हर गांव से दस सक्रिय सदस्य बनते हैं तो पूरे प्रदेश में लगभग साढ़े चार लाख सक्रिय सदस्य जेडीयू से जुड़ जाएंगे। यह सभी लोग न सिर्फ जेडीयू को मजबूत बनाएंगे बल्कि संगठन का विस्तार बिहार के हर गांव तक पहुंच जाएगा।

दरअसल इस पूरी कवायद की बड़ी वजह यह बताई जा रही है कि पिछली बार विधानसभा चुनाव के पहले भी जेडीयू संगठन को लेकर बड़ा दावा किया गया था। लेकिन संगठन की हकीकत पटना के गांधी मैदान में जेडीयू कार्यकर्ताओं की रैली में दिख गई थी, और उसके बाद विधानसभा चुनाव में इसका काफी असर भी पड़ा था। इसलिए अब दोबारा ऐसी गलती न हो इसको लेकर जेडीयू अभी से ही सक्रिय हो गई है।