मधुबनी : प्रवासी पक्षियों के आगमन से त्रिवेणी संगम पट गुलजार, जानें…

बाबूबरही (मधुबनी)। प्रखंड के पिपराघाट स्थित त्रिवेणी संगम तट इन दिनों प्रवासी पक्षियों के कलरव व अटखेलियों से गुलजार हो रहा है। प्रवासी पक्षियों के आगमन से स्थानीय लोगों में कौतुहल है। लोगों का कहना है कि इस बार जो पक्षी इस इलाके में देखे जा रहे हैं, वे पहली बार यहां आए हैं।इससे पहले इन पक्षियों को यहां कभी नहीं देखा गया। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले दिसंबर, जनवरी व फरवरी माह में अन्य प्रजाति के विदेशी पक्षियों को यहां देखा जाता था, लेकिन इस बार मार्च के तीसरे सप्ताह में यहां एक अलग प्रजाति के पक्षी पहुंचे हैं। अमोला मुसहर टोली के लोगों ने बताया कि कुछ शिकारी जाल बिछाकर इन पक्षियों को फंसाने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन वे सफल नहीं हो सके।

लोगों का मानना है कि ये पक्षी साइबेरियन हो सकते हैं जो अपने देश लौटने के क्रम में यहां उचित आवोहवा पाकर कुछ दिनों के लिए विचरण कर रहे हैं। हालांकि, इन पक्षियों के संबंध में वन विभाग को भनक तक नहीं है। अब तक वन विभाग की टीम यहां नहीं पहुंची है।

साइबेरियन पक्षियों के बारे में स्थानीय लोगों का कहना है कि उन इलाकों में कड़ाके की ठंड व बर्फ पिघलने के कारण पक्षी हजारों किमी दूरी तय कर यहां आते हैं। दिसंबर से फरवरी तक उनके प्रवास का समय होता है। उसके बाद वे वापस लौट जाते हैं। बता दें कि वर्ष 2020 में कोविड लाकडाउन के दौरान एक अलग किस्म के विदेशी मेहमान पक्षी त्रिवेणी संगम तट पर देखे गए थे।

हालांकि, कुछ दिन बाद ही वे वापस लौट गए थे। पिपराघाट में विलुप्त गिद्धों को भी देखा जा रहा है। पूर्व पशुपालन पदाधिकारी डा. सुरंजन सरकार ने कहा कि जानवरों के लिए उपयोग में आने वाले दर्द निवारक डाईक्लोफिनेक इंजेक्शन गिद्धों का शत्रु साबित होता था। ऐसे जानवर जिन्हें उक्त इंजेक्शन दिया गया हो तथा उनका मांस गिद्ध खाते तो गिद्धों का भी मरना तय था।

बताया कि अब डाईक्लोफिनेक इंजेक्शन पर पर रोक लगा दिया गया है। गिद्धों ने मुख्य रूप से सेमल के ऊंचे पेडों को अपना बसेरा बनाया है। लोगों का कहना है कि नदी में मछली के शिकार को लेकर इन्होंने अपना बसेरा यहां बनाया है। इलाके के बुजुर्ग बताते हैं कि पहले जो गिद्ध पाए जाते थे वे काले रंग के होते थे। जबकि, इस बार सफेद पीठ वाले गिद्ध देखे जा रहे हैं। प्रखंड का पिपराघाट तीन नदियों के संगम तट के लिए जाना जाता है। यहां कमला, बलान व सोनी नदी का संगम होता है जिसके कारण इसका नाम त्रिवेणी संगम तट पड़ा।

यहां दियारा क्षेत्र काफी फैला हुआ है जो पक्षियों के वास के लिए उपयुक्त माना जाता है। साथ ही संगम तट होने के कारण आध्यात्मिक व धार्मिक दृष्टि से भी यह स्थल काफी महत्व रखता है। संगम तट पर अब कार्तिक मास में अधिवास का आयोजन भी होने लगा है जिसमें पूरे माह बुजुर्ग व साधु-संत कुटिया बनाकर संगम तट पर वास करते हैं और ईश्वर की आराधना में लीन रहते हैं।

मिथिला वन प्रमंडल पदाधिकारी, दरभंगा सुबोध कुमार गुप्ता ने कहा कि बाबूबरही के त्रिवेणी संगम तट पर नए प्रजाति के पक्षियों के आगमन की जानकारी नहीं है। विभागीय स्तर पर शीघ्र ही इसकी जानकारी लेकर समुचित कदम उठाया जाएगा।

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