बिहार : कोरोना काल में टीबी की बीमारी हावी हुई है। पटना में 2021 में 17192 लोगों में टीबी डिटेक्ट हुई है। यह काफी बड़ा और चौंकाने वाला आंकड़ा है। इसमें कई राज्य से पलायलन कर चुके हैं। टीबी मुक्त भारत का दावा करने वाली सरकार भी कोरोना काल में संक्रमण की चपेट में आए लोगों के लिए अनुदान नहीं दे पा रही है।

एक साल में डिटेक्ट हुए लगभग 17 हजार मरीजों में महज 52% को ही मदद मिल पाई है। कोरोना से टीबी का कनेक्शन की पुष्टि तो नहीं हो पाई है, लेकिन आशंका है कि कोविड संक्रमण के बाद कमजोर हुए लंग्स पर टीबी का अटैक हुआ है। ऐसे में लक्षण हो तो तत्काल टीबी की जांच कराएं और गंभीर होने से बचे।

कोरोना से अब तक राज्य में 8,30,435 लोग कोरोना संक्रमित हुए है, इसमें 8,18,144 लोगों ने कोरोना को मात दिया है। संक्रमितों में 12,256 लोगों की मौ’त हाे गई है। संक्रमितों में ऐसे लोगों की संख्या भी कम नहीं है जिनका लंग्स इफेक्टिव हुआ है। लंग्स पर असर पड़ने के कारण समस्या आई है।

ऐसे में लंग्स में संक्रमण का खतरा बना रहता है। लंग्स के कमजोर होने से कोरोना काल में टीबी के बढ़े मामलों को लेकर लोगों की मुश्किल बढ़ गई है। सरकार भी टीबी को लेकर अब गांव से लेकिर शहर तक संक्रमितों की तलाश की जा रही है।

कोरोना काल में एक साल में रिकॉर्ड तोड़ मरीज आए हैं, लेकिन सरकारी से अधिक प्राइवेट अस्पतालों में चिन्हित किए गए हैं। पटना में 2021 में टीबी के 17,192 मरीज चिन्हित किए गए हैं। टीबी विभाग की जिला कार्यक्रम समन्वयक प्रीति जोशी की मानें तो पिछले वर्ष 2021 में 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक पटना जिले में 17,192 टीबी के मरीज चिन्हित किए गए हैं। इसमें सरकारी अस्पतालों में चिन्हित मरीजों की संख्या 3881 तथा निजी स्वास्थ्य संस्थानों में चिन्हित मरीजों की संख्या 13,311 है। बड़ी बात यह है कि चिन्हत मरीजों में भी कई पलायन कर चुके हैं। प्रीति का कहना है कि इनमें से कुछ मरीज जिला से व्यक्तिगत कारणों से पलायन कर चुके हैं, अभी जिले में चिन्हित टीबी के मरीजों की कुल संख्या 15,824 है।

नियम है कि टीबी के मरीजों हर माह 500 रुपए पोषण के लिए दिया जाए। टीबी उन्मूलन को लेकर सरकार की तरफ से ऐसी व्यवस्था बनाई गई है। इसमें दवाएं तो मुफ्त दी जाती है साथ ही 500 रुपए महीने दिया जाता है। पटना में 8538 लोगों को निश्चय पोषण योजना के तहत भुगतान किया जाना है। स्वास्थ्य विभाग से मिली जानकारी के मुताबिक चिन्हित मरीजों में से कुल 8538 लोगों को निश्चय पोषण योजना के तहत पोषण राशि का भुगतान किया जा चुका है।

इसके लिए कुल 4 करोड़ 71 लाख 41 हजार 500 रुपए की राशि का भुगतान किया गया है। स्वास्थ्य विभाग का दावा है कि आने वाले दिनों में बचे मरीजों को भी भुगतान कर दिया जाएगा। चिन्हित मरीजों के खाते में पोषण योजना के तहत राशि का भुगतान करने के लिए प्रयास किया जा रहा है। जिला संचारी रोग पदाधिकारी डॉ. कुमारी गायत्री सिंह का कहना है कि विभाग 2025 तक जिले को टीबी से मुक्त करने के लक्ष्य पर काम कर रहा है। पहले के मुकाबले मृत्यु दर में भी काफी कमी आई है।

खांसी आना, पसीना आना, बुखार रहना, थकावट होना, वजन घटना, सांस लेने में परेशानी हो तो तत्काल डॉक्टर से संपर्क कर टीबी की जांच कराएं। जांच में पुष्टि हो जाने के बाद मरीज को मुफ्त में दवा दी जाती है। इसके साथ ही भोजन के लिए भी 500 रुपए महीना दिया जाता है। जिले के सभी सरकारी अस्पतालों में टीबी की जांच और इलाज की व्यवस्था का दावा किया जा रहा है, लेकिन डिटेक्ट प्राइवेट अस्पतालों में अधिक किए गए हैं। साधारण टीबी और एमडीआर टीबी दोनों में से किसी भी तरह के मरीज हों, अपनी दवाओं का नियमित सेवन करें। साधारण टीबी मरीजों की दवा छह महीने तथा एमडीआर की छह से 20 महीने तक चलती है। सरकार टीबी उन्मूलन के लिए “इन्वेस्ट टू एंड टीबी-सेव लायिव्स” थीम पर काम कर रही है।