पटना। विशेष भूमि सर्वेक्षण की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही भूदान के नाम पर हुई भूमि की हेराफेरी का भी पता चल जाएगा। सर्वेकर्मियों को यह भी देखना है कि जमींदारों ने उस भूमि को भी तो दान में नहीं दे दिया, जिनका स्वामित्व उनके पास नहीं था। इस श्रेणी के दान को अवैध घोषित किया जाएगा। भूमि पर फिर से राज्य सरकार का स्वामित्व कायम हो जाएगा।
इसके अलावा भूदान में दी गई भूमि वापस लेने के मामलों की भी खोज हो रही है। विशेष भूमि सर्वेक्षण के लिए जारी निर्देश में कहा गया है कि जमींदारी उन्मूलन के बाद किसी पूर्व जमींदार ने भूदान यज्ञ में गैर मजरूआ (खास) श्रेणी की भूमि का दान कर दिया है तो वह मान्य नहीं होगा, क्योंकि जमींदारी उन्मूलन के बाद गैर मजरूआ (खास) भूमि सरकार के अधीन हो गई थी।
अगर उस भूमि के दान को तत्कालीन भूमि सुधार उप समाहर्ता ने संपुष्ट किया हो तो वह भी मान्य नहीं होगा। सर्वेक्षण के बाद इस श्रेणी की भूमि के स्वामित्व का खाता राज्य सरकार के नाम से खोला जाएगा। निर्देश के अनुसार भूदान यज्ञ समिति को प्राप्त भूमि से संबंधित दान पत्रों को अब तक भूमि सुधार उप समाहर्ता ने संपुष्ट नहीं किया है, उस हालत में भी उसका खाता यज्ञ समिति के नाम से ही खोला जाएगा।
सर्वे का लाभ उन रैयतों को मिल सकता है, जिनके नाम से यज्ञ समिति ने भूमि प्रमाण पत्र जारी किया था, लेकिन भूमि पर कब्जा नहीं हो पाया। मूल प्रमाण पत्र धारक के बदले किसी और का कब्जा अवैध माना जाएगा। वास्तविक लाभार्थी की खोज होगी। उनकी अनुपस्थिति में फिर वह भूमि बिहार भूदान यज्ञ समिति के स्वामित्व में चली जाएगी।
