कुछ महीने पहले ही सुपरहिट फिल्म पुष्पा ने बॉक्स ऑफिस पर खूब धमाल मचाया था। इस फिल्म की कहानी, डायलॉग, एक्शन और गाने की सबने खूब तरीफ की थी। इस फिल्म की कहानी काफी हद तक रियल सबजेक्ट पर आधारित थी। फिल्म में प्रतिबंधित लकड़ी की तस्करी की कहानी दिखाई गयी है। भारत के कई राज्यों से प्रतिबंधित लकड़ी की तस्करी की खबरें भी आती रहती हैं। 
ताजा मामला झारखंड के सिमडेगा जिले में देखना को मिला है जहां काफी हद तक फिल्म पुष्पा की कहानी नजर आती है। दरअसल वन विभाग के लाखों प्रयास के बाद भी सिमडेगा के जंगलों से लकड़ी तस्करी का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। सिमडेगा जिले में पड़ने वाले वाइल्ड लाइफ संरक्षित वन क्षेत्र में लकड़ी तस्करों ने एक बार फिर से घुस कर जंगल काटने का सिलसिला शुरू कर दिया है। 
तभी तो गुरुवार को पाकरटांड पुलिस की सूचना पर पालकोट वाइल्ड लाइफ वन क्षेत्र के पदाधिकारी सिमडेगा के क्रुसकेला जंगल से पाकरटांड पुलिस के सहयोग से भारी मात्रा में कटे हुए साल वृक्ष के बोटे बरामद किए हैं। बता दें, इससे पूर्व भी दो बार इस वाइल्ड लाइफ संरक्षित वन क्षेत्र से तस्करी के लिए काट कर रखी गई लकड़ी जब्त की गयी थी।

वाइल्ड लाइफ डिविजन के डीएफओ रांची में बैठते हैं और पालकोट वाइल्ड लाइफ संरक्षित वन क्षेत्र का एक हिस्सा सिमडेगा जिला में है। अलग जिला होने के कारण इन जंगलों में वहां के वन कर्मियों का बहुत कम आगमन होता है, जिसका फायदा तस्कर जंगलों में उठाते रहते है।

जंगलों के रास्ते छतीसगढ़ पहुंचाई जाती हैं लकड़ियां
सूत्रों की माने तो पाकरटांड प्रखंड में पडने वाले वाइल्ड लाइफ संरक्षित वन क्षेत्र से नक्सली और अपराधिक संगठनों की छत्रछाया में लकड़ी की तस्करी की जा रही है. तस्कर यहां बड़े आराम से लकड़ी काटते हैं, क्यों कि वे जानते हैं कि सिमडेगा वन विभाग का यह क्षेत्र नहीं है. लकड़ी काट तस्कर बडे आराम से जंगलों के रास्ते छतीसगढ तक लकडी पंहुचा देते हैं, जहां से लकड़ियां बिहार तक भेजी जाती हैं। इस तस्करी में नक्सलियों के भी शामिल होने के कारण ग्रामीण भी चुप्पी साधे रहते हैं।

इसके अलावा सिमडेगा जलडेगा वन क्षेत्र में भी लकड़ी तस्कर हावी हैं. सूत्रों की माने तो इन क्षेत्रों में गुमला सिसई के तस्करों का दबदबा है। सूचना है कि इन तस्करों के सिर पर भी किसी बड़े आदमी का हाथ है, जिसके कारण ये यहां से भारी मात्रा में लकड़ी तस्करी कर रहे हैं।