मुजफ्फरपुर। महज दो डिसमिल जमीन के एक दस्तावेज पर लोन लेकर तीन बैंकों को लाखों रुपये का चूना लगाने का मामला पकड़ में आया है। एक बैंक की शाखा द्वारा जमीन की नीलामी के बाद दो बैंक की शाखाओं के पदाधिकारियों के हाथ-पांव फूलने लगे हैं कि राशि की वसूली कैसे हो।
यह मामला अहियापुर थाना क्षेत्र का है। सचिदानंद कुमार ने मां और चाची के नाम की जमीन को मॉरगेज कर तीन बैंकों से होम एवं अन्य लोन लिए। जमीन की कीमत से कई गुणा अधिक ऋण लेने के बाद वह डिफॉल्टर हो गया।

खाता एनपीए होने के बाद केनरा बैंक की भगवानपुर शाखा ने 44 लाख रुपये की वसूली के लिए सरफेसी एक्ट के तहत कार्रवाई शुरू की। शहबाजपुर स्थित मॉरगेज की गई जमीन एवं बने मकान की नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर ली गई। यह प्रक्रिया पूरी होने के बाद ऋण देने वाले दो बैंकों की शाखा हरकत में आई।
एसबीआई की सूतापट्टी शाखा एवं बैंक ऑफ बड़ौदा की पहाड़पुर शाखा, पुरानी मोतिहारी रोड को उससे क्रमश: 48 लाख एवं 16 लाख की वसूली की जानी है। अब परेशानी यह है कि एक बैंक ने मॉरगेज की गई जमीन की नीलामी कर दी। नीलामी में जमीन लेने वाले ने 25 प्रतिशत राशि नियम के मुताबिक जमा भी कर दी है। सामान्यत जिस जमीन को ऋण के लिए मॉरगेज किया जाता उसका मूल दस्तावेज बैंक में जमा कर लिया जाता है। अब यहां सवाल उठ रहा कि तीन अलग-अलग वर्षों में एक ही जमीन के दस्तावेज पर कैसे ऋण दिए गए।
इसमें होम लोन भी शामिल हैं। सचिदानंद ने एक ही बैंक को मूल दस्तावेज दिया होगा। शेष दो बैंकों को जो दस्तावेज दिया गया उसे कहां से तैयार कराया गया। अगर मूल दस्तावेज पर ऋण नहीं दिए गए तो बैंक के पदाधिकारियों की भूमिका भी सवाल के घेरे में आएगी।
केनरा बैंक के रिकवरी पदाधिकारी रोशन ने कहा की ‘बैंकों के साथ फर्जीवाड़ा किया गया है। इसकी पड़ताल की जा रही है। लोन के लिए जो दस्तावेज दिए गए थे उसका पहला पेज मूल था। अंदर के पेज में गड़बड़ी है। जमीन नीलामी के बाद यह मामला पकड़ में आया है। आगे की कार्रवाई की जा रही है।’
