जिले को टीबी मुक्त करने के लिए हर स्तर पर पहल चल रही है। सरकारी अस्पताल की तरह निजी क्लीनिक चलाने वाले चिकित्सक भी मरीज की खोज कर रहे हैं। उनके क्लीनिक पर जिन मरीजों की पहचान हो रही है, उन्हें भी मुफ्त में टीवी की दवा दी जा रही है। जानकारी के अनुसार, अगर कोई निजी दवा दुकानदार टीबी मरीज को नियमित दवा देता है तो उसको उचित पारिश्रमिक दी जा रही है।

प्रभारी जिला यक्ष्मा पदाधिकारी डा. उपेंद्र चौधरी ने बताया कि निजी प्रैक्टिस करने वाले चिकित्सकों की ओर से 760 टीबी मरीजों की खोज की गई है। इसमें एमडीआर के 34 मरीजों की पुष्टि हुई है। डा. चौधरी ने बताया कि जिले में 22 टीबी जांच केंद्र काम कर रहे हैं। हर पीएचसी में जांच की सुविधा दी गई है। इसके साथ चार ट्रूनेट मशीन जो जिला यक्ष्मा केंद्र, एसकेएमसीएच, बंदरा व पारू में लगाया गया है।

जानकारी के अनुसार निजी चिकित्सकों को प्रत्येक टीबी मरीज की खोज पर 500 रुपये दिए जा रहे हैं। मरीज की खोज कर उनको सरकारी अस्पताल से जोडऩा है। मरीजों को यहीं छह माह तक मुफ्त में दवा मिलेगी। हर तरह की दवा व जांच सरकारी सेंटर पर मुफ्त उपलब्ध है।

– वजन का लगातार कम होना
– भूख न लगना
– सीने में दर्द
एईएस के प्रभाव को कम करेगा स्वर्णप्राशन
मुजफ्फरपुर : बच्चों में एईएस के प्रभाव को स्वर्णप्राशन कम करेगा। इससे उनके अंदर रोगरोधी क्षमता विकसित होती है। उनका शारीरिक व मानसिक विकास होता है। पाचन शक्ति को भी यह बढ़ाता है। जीवन धारा पंचकर्म क्लीनिक के संचालक वैद्य पवन कुमार ने यह कहते हुए बताया कि आठ मई को 20 बच्चों को निशुल्क स्वर्णप्राशन कराया जाएगा।

इसमें शून्य से 16 साल तक के बच्चे शामिल होंगे। स्वर्णप्राशन के साथ एलर्जी की दवा भी वितरित की जाएगी। उन्होंने बताया कि कुछ समय पहले गोरखपुर में स्वर्णप्राशन से एईएस के प्रभाव को कम करने में काफी सहायता मिली थी। जिले में एईएस प्रभावित क्षेत्रों में स्वर्णप्राशन कराने को लेकर जिलाधिकारी, सिविल सर्जन को भी पत्र लिखा गया हैं। उनकी ओर से सहमति मिलने के बाद मुफ्त दवा का वितरण किया जाएगा।