चालू वित्तीय वर्ष का बजट पारित करने के लिए गुरुवार को होने वाली नगर निगम बोर्ड की बैठक पर सियासी बादल मंडरा रहा है। एक ओर महापौर ई. राकेश कुमार ने पत्र जारी कर बैठक को स्थगित करते हुए नई तिथि 9 मई को निर्धारित की है। वहीं नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय ने कहा है बैठक स्थगित करने संबंधी कोई पत्र उन्हें प्राप्त नहीं हुआ है। महापौर का कहना है कि बैठक को स्थगित करने संबंधी पत्र जब सामान्य शाखा को भेजा गया तो एक भी कर्मचारी वहां मौजूद नहीं था।

नगर आयुक्त के पास भेजा गया तो वे बिना पत्र लिए कार्यालय से निकल गए। बाद में महापौर की उपस्थिति में सशक्त स्थायी समिति सदस्य राकेश कुमार सिन्हा पप्पू ने संध्या सवा पांच बजे नगर आयुक्त के कार्यालय कक्ष के बाहर महापौर के पत्र को चस्पा कर दिया। वहीं वार्ड पार्षद नंद कुमार प्रसाद साह के नेतृत्व में निगम के डेढ़ दर्जन पार्षदों ने कहा है कि बजट पारित नहीं होने से शहर का विकास बाधित होगा।

निगम के सामने वित्तीय संकट की स्थिति उत्पन्न हो जाएगी, इसलिए किसी भी स्थिति में बैठक स्थगित नहीं होगी। महापौर बार-बार बैठक को स्थगित कर शहर के विकास में बाधा उत्पन्न कर रहे हैं। ऐसे में बैठक होगी या नहीं होगी यह तो गुरुवार को पता चलेगा, लेकिन नगर निगम का बजट पारित नहीं हुआ तो विकास के नाम पर निगम एक रुपये भी खर्च नहीं कर पाएगा।

वैध-अवैध के बीच फंसी 19 अप्रैल को हुई बोर्ड की बैठक
मुजफ्फरपुर : नगर निगम बोर्ड की पिछली बैठक 19 अप्रैल को नगर भवन में हुई थी, लेकिन बैठक की कार्यवाही आज तक नहीं निकली है। नगर निगम की सियासत के बीच बैठक वैध एवं अवैध के बीच फंस गई है। स्मार्ट सिटी की बैठक में शामिल होने के लिए मुख्यालय से बाहर रहने के कारण नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय बैठक में शामिल नहीं हो पाए थे, लेकिन उन्होंने अपनी जगह नगर प्रबंधक को बैठक का संचालन पदाधिकारी मनोनीत कर दिया था, लेकिन महापौर ई. राकेश कुमार ने नियमों का हवाला देते हुए नगर आयुक्त के फैसले को निरस्त करते हुए अपर नगर आयुक्त विवेक कुमार को बैठक का संचालन पदाधिकारी मनोनीत कर पत्र जारी कर दिया।

विवेक कुमार ने नियमों का हवाला देते हुए बैठक संचालित करने से इन्कार कर दिया। बाद में बैठक का संचालन नगर प्रबंधक ओम प्रकाश ने किया। निगम प्रशासन का कहना है कि चूकी महापौर द्वारा जब नगर आयुक्त के फैसले को निरस्त कर दिया गया था, ऐसे में नगर प्रबंधक बैठक का संचालन नहीं कर सकते। ऐसे में बिना महापौर के लिखित आदेश के नगर प्रबंधक बैठक का संचालन नहीं कर सकते। इसलिए बैठक अवैध हुआ ऐसे में बैठक की कार्यवाही कैसे निकल सकती है। सरकार से मार्गदर्शन मांगा गया है। वहीं महापौर का दावा है कि नगर आयुक्त जानबूझ कर बैठक की कार्यवाही नहीं निकाल रहे। उन्होंने बैठक को पूरी तरह से वैध बताते हुए नगर आयुक्त पर सियासत करने का आरोप लगाया है।