पटना। पटना देश में नाम कर रहा है, पर किसी बेहतर काम के लिए नहीं, प्रदूषण के मामले में। नाम ही नहीं बिहार की राजधानी अव्वल है। गंदी हवा उड़ाने में। ताजा आंकड़े में पटना फिर से देश का नंबर वन प्रदूषित शहर बन गया है। दूसरे स्थान पर मुजफ्फरपुर व गाजियाबाद तीसरे नंबर पर है। इससे पहले भी पटना ने 21 दिसंबर को देश के 60 शहरों में सबसे प्रदूषित होने का रिकॉर्ड बनाया था। मंगलवार को पटना का वायु गुणवत्ता सूचकांक पीएम2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) का स्तर 453 माइक्रोग्राम प्रतिघन मीटर रिकॉर्ड किया गया। मुजफ्फरपुर में पीएम2.5 का स्तर 447 और गाजियाबाद में 416 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर दर्ज किया गया।
राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य मानक से सात गुना अधिक
पटना की वायु गुणवत्ता दूसरे दिन राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की तुलना में बेहद खतरनाक स्तर पर रही। सोमवार को पटना में पीएम2.5 का स्तर बढ़कर 427 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पहुंचा था। मुजफ्फरपुर में 425 और नई दिल्ली में 418 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकॉर्ड किया गया। इससे पहले 30 दिसंबर को भी पटना में पीएम2.5 (पार्टिकुलेट मैटर) 414 और मुजफ्फरपुर में 422 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर रिकॉर्ड किया गया था। यह स्तर राष्ट्रीय स्तर पर सामान्य मानक से सात गुना से अधिक खराब है। पटना में 21 दिसंबर को देश में सबसे प्रदूषित वायु रिकॉर्ड की गई थी। पीएम2.5 का स्तर 463 माइक्रोग्राम प्रति घनमीटर पहुंच गया था। 22 दिसंबर को 446, 23 दिसंबर को 406 और 24 दिसंबर को 394 प्रति घनमीटर रिकॉर्ड हुआ था। बाद में मामूली सुधार हुआ लेकिन 28 दिसंबर से प्रदूषण की मात्र में लगातार इजाफा हुआ है।
हिमाचल की हवा और गंगा का पानी नुकसानदेह

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने वायु गुणवत्ता खराब होने के पीछे हिमालय की ओर से आने वाली हवा में गंगा की बालू, शहर में ट्रैफिक जाम और खुले में कचरा और कृषि अपशिष्ट जलाना माना है। बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. अशोक कुमार घोष ने प्रदूषण को लेकर पटना सहित राज्य के सभी जिलाधिकारियों को पत्र लिखकर वायु गुणवत्ता में सुधार के लिए 23 दिसंबर को एडवाइजरी जारी की। नगर निगम, खनन विभाग और परिवहन विभाग को समेकित रूप से हवा की खराब हो रही गुणवत्ता से जनमानस की सुरक्षा के लिए कार्रवाई का आग्रह किया लेकिन कोई असर नहीं हुआ।