बिहार का चर्चित राजनीतिक हत्याकांड राजो सिंह मर्डर केस का 16 साल आठ माह बाद शुक्रवार को फैसला आया। जिला एवं सत्र न्यायधीश तृतीय संजय सिंह ने सुनवाई पूरी करते हुए साक्ष्य के अभाव में सभी पांच आरोपियों को बरी कर दिया। जबकि, मंत्री अशोक चौधरी समेत पांच अन्य नामजद अभियुक्तों को एसपी अमित लोढ़ा ने पहले ही सुपरविजन में क्लीनचिट दे दी थी।

लोक अभियोजक शंभुशरण सिंह ने बताया कि राजद नेता शंभु यादव, पिंटू महतो, अनिल महतो, बच्चु महतो और राजकुमार को रिहा कर दिया गया है। इस हत्याकांड में कुल 33 लोगों ने गवाही दी। इसके अलावा दो डॉक्टर और दो अनुसंधानक की भी गवाही हुई। गवाहों के होस्टाइल हो जाने और इस हत्याकांड के सूचक बरबीघा विधायक व राजो बाबू के पौत्र सुदर्शन कुमार द्वारा केस नहीं लड़ने की कोर्ट में दी गई गवाही के बाद सभी आरोपी बरी हो गये। इस हत्याकांड की सुनवाई को लेकर शुक्रवार को कोर्ट में सुरक्षा भी कड़ी व्यवस्था की गई थी। वहीं कोर्ट के फैसले पर नजर गड़ाये लोगों का भी जमावड़ा कोर्ट परिसर में लगा हुआ था।

नौ सितंबर 2005 को पूर्व सांसद राजो सिंह व एक अधिकारी की स्टेशन रोड स्थित आजाद हिन्द आश्रम में गोली मारकर निर्मम हत्या कर दी गई थी। इस हत्याकांड में अबतक मात्र दो आरोपी शंभु यादव और अनिल महतो को पुलिस गिरफ्तार कर सकी थी। 23 जून 2007 को हाईकोर्ट से जमानत मिलने पर वे दोनों आरोपी भी बाहर आ गये थे।

राजो सिंह हत्याकांड में बरबीघा विधायक और राजो बाबू के पौत्र सुदर्शन कुमार ने सदर थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इस मुकदमे में वर्तमान में भवन निर्माण मंत्री अशोक चौधरी, पूर्व विधायक रंधीर कुमार सोनी, पूर्व सभापति मुकेश यादव, लटरू पहलवान, मुनेश्वर महतो सहित रिहा हुए सभी पांच आरोपियों को नामजद किया गया था।

वर्ष 2008 में तत्कालीन एसपी अमित लोढ़ा ने अपनी सुपरविजन रिपोर्ट में मंत्री अशोक चौधरी, रंधीर कुमार सोनी, मुकेश यादव, लटरू यादव और मुनेश्वर महतो को क्लीनचिट दे दी थी। बाद में इस केस में पिंटू महतो, बच्चु महतो सहित अन्य को गैर प्राथमिक अभियुक्त बनाया गया था। राजो बाबू के परिवार वालों की मांग पर तत्कालीन राज्यपाल बूटा सिंह ने राजो सिंह हत्याकांड की जांच सीबीआई से कराने की सिफारिश की थी। लेकिन, केंद्र सरकार से इसकी मंजूरी नहीं मिली।

राजो बाबू जैसे दिग्गज राजनेता की हत्या की गुत्थी अबतक अनसुलझी रह गई। इस प्रकरण में पुलिस की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न लग गया है। कोर्ट के फैसले को सत्य की जीत बताते हुए राजद नेता शंभु यादव ने कहा कि घटना के दिन वे घर पर ही थे। हत्या की खबर सुनने के बाद राजो बाबू को देखने जा रहे थे। इसी दौरान पुलिस ने पकड़ लिया था। जबकि, राजो बाबू की हत्या से उनका कोई लेना-देना नहीं था। राजो बाबू की हत्या को शुरुआत में टाटी नरसंहार का बदला भी माना जा रहा था। वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव से पहले राजो बाबू की हत्या को चुनाव से भी जोड़ा गया था। लेकिन, इतने साल की कार्रवाई में भी पुलिस पुख्ता साक्ष्य नहीं जुटा पाई और उनकी हत्या से पर्दा नहीं उठ सका।