यह कैसा न्याय:जिसके पेट में काॅटन छाेड़ा, उसपर तुरंत केस, पर सर्जन के खिलाफ जांच के लिए थानेदार ने अबतक पत्र भी नहीं भेजा

पटना एम्स में सर्जरी के दाैरान जिस महिला डाॅक्टर के पेट में कॉटन छोड़ दिया गया था, पुलिस ने उसी के खिलाफ केस दर्ज कर लिया, लेकिन आराेपी सर्जन पर अबतक नहीं। पीड़िता डाॅक्टर पूजा ने 11 जून काे ही सर्जरी करने वाली एम्स की गायनी की हेड डाॅ. हिमाली के खिलाफ आवेदन देकर प्राथमिकी दर्ज करने काे कहा था।

इसपर फुलवारीशरीफ पुलिस ने तर्क दिया था कि मेडिकल बाेर्ड की जांच के बाद जाे रिपाेर्ट आएगी उस आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। डाॅ. पूजा द्वारा आवेदन दिए छह दिन गुजर चुके हैं, लेकिन थानेदार एकरार अहमद ने मेडिकल बाेर्ड का गठन करने के लिए एम्स और सिविल सर्जन काे पत्र तक नहीं भेजा है। जब थानेदार इस बाबत से पूछा गया ताे उन्हाेंने कहा कि यहां काम का बहुत लाेड है। परेशान हाे गए हैं।

केस की आईओ अनुप्रिया काे कहा गया है कि शुक्रवार काे मेडिकल बाेर्ड का गठन करने के लिए एम्स और सिविल सर्जन काे पत्र भेज दें। चाैंकाने वाली बात है कि डाॅ. हिमाली ने जब 11 जून काे डाॅ. पूजा के खिलाफ केस दर्ज करने के लिए आवेदन दिया ताे थानेदार ने उसी दिन दर्ज कर लिया था।

दोबारा सर्जरी होने के बाद डाॅ. पूजा ने कहा कि मैंने अपने अधिवक्ता के माध्यम से एम्स के निदेशक, गायनी की हेड डाॅ. हिमाली और अल्ट्रासाउंड विभाग के डाॅ. सुमैर काे लीगल नोटिस भेजा है। उन्होंने यह भी कहा कि न्याय के लिए कंज्यूमर फोरम में भी गुहार लगाऊंगी। इस संबंध में पूछे जाने पर एम्स के प्रभारी निदेशक डाॅ. सौरभ वार्ष्णेय ने कहा कि अबतक किसी तरह का लीगल नोटिस नहीं आया है। इस मामले में एम्स की आर से गठित इंटरनल कमेटी जांच कर रही है। दो-चार दिनाें में जांच रिपाेर्ट आ जाएगी। टीम मरीज के मेडिकल रिकाॅर्ड की जांच कर रही है।

दाेबारा सर्जरी करा निकलवाया था काॅटन
एम्स के स्त्री रोग विभाग की हेड डाॅ. हिमाली और उनकी टीम ने 14 सितंबर 2021 को महिला डाॅक्टर पूजा का मेजर ऑपरेशन करके प्रसव कराया था। ऑपरेशन के दौरान पेट में ही कॉटन छोड़ दिया गया था। इस वजह से इन्फेक्शन हो गया। तकलीफ हाेने के बाद जब महिला डाॅक्टर ने एक प्राइवेट अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराया तो पता चला कि पेट में कॉटन है।

इसके बाद डाॅ. पूजा 10 जून काे शिकायत करने एम्स पहुंचीं। उनपर आराेप है कि उन्हाेंने गार्ड के साथ मारपीट की और काम में बाधा पहुुंचाई। इसकाे लेकर उनके खिलाफ केस भी दर्ज करा दिया गया। डाॅ पूजा की दोबारा सर्जरी कर प्राइवेट डाॅक्टर ने कॉटन निकाला।

एम्स के दबाव में ताे नहीं पुलिस?
फुलवारीशरीफ के थानेदार ने छह दिन के बाद भी मेडिकल बाेर्ड का गठन करने के लिए पत्र नहीं भेजा। अगर मेडिकल बाेर्ड ने डाॅ. हिमाली और उनकी टीम की इसमें लापरवाही पाई और थाने काे केस दर्ज करना पड़ा ताे क्या फुलवारी थानेदार उनपर कार्रवाई कर सकेंगे? सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या एम्स प्रशासन के दबाव में फुलवारीशरीफ थानेदार और थाना काम कर रहा है?

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