कोरोना के सामान्य मरीजों की भी याददाश्त हुई कम:विशेषज्ञ बोले- स्वाद-सुगंध का गायब होना न्यूरो प्रॉब्लम

वाराणसी के BHU में चल रहे न्यूरो कांफ्रेंस के दौरान देश भर से आए डॉक्टरों ने कहा कि कोरोना के बाद डिमेंशिया का खतरा बढ़ने लगा है। अभी तक लोगों को लगता था कि जिन्हें कोरोना के दौरान ऑक्सीजन की जरूरत पड़ी थी, केवल उन्हें ही मेंटल प्रॉब्लम्स आ रहीं हैं। मगर, अब जो लोग कोरोना के सामान्य मरीज थे, वे भी तमाम मानसिक विकारों से ग्रसित हो रहे हैं।

न्यूरो सांइटिस्ट ने माना कि कोविड के बाद डिप्रेशन के मरीजों की तादाद बढ़ी है। - Dainik Bhaskar

उनकी याददाश्त कम हो रही है। रात में नींद न लगने और तमाम मेंटल प्रॉब्लम सामने आ रहीं हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि कोरोना का दिमाग पर गहरा असर पड़ा है। न्यूरो कांफ्रेंस में BHU के न्यूरोलॉजिस्ट प्रो. वीएन मिश्रा, डॉ. दीपिका जोशी और डॉ. अभिषेक पाठक समेत देश भर के कई न्यूरो सांइटिस्ट ने माना कि कोविड के बाद डिप्रेशन के मरीजों की तादाद बढ़ी है।

RIMS, रांची के डायरेक्टर प्रो. कामेश्वर प्रसाद ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि जिन्हें ऑक्सीजन की जरूरत नहीं पड़ी उन्हें भी रात में नींद टूटने, भूलने की समस्या, पढ़ने में कन्संट्रेशन न बन पाने, एंजायटी और डिप्रेशन जैसी समस्या देखीं जा रहीं हैं।

कोरोना के वायरस ने दिया न्यूरो समस्याओं को जन्म
प्रो. प्रसाद ने कहा कि कोरोना भले ही सीधे तौर पर फेफड़े और फ्लू से संबंधित बीमारी हो, मगर इसका एक कनेक्शन न्यूरो बीमारियाें से भी है। हमें याद होगा कि कोरोना होने के बाद स्मेल-टेस्ट गायब हो जाता था।

ये दोनों समस्याएं तो हमारे तंत्रिकाओं से जुड़ी हैं। यह एक तरह से न्यूरो की ही समस्या है। यह दिखाता है कि वायरस नसों को प्रभावित करता है। अब वायरस ने ब्रेन को कितना प्रभावित किया, इस पर रिसर्च चल रहे हैं। जल्द ही इसकी वजह साफ होगी।

ऑक्सीजन की कमी से सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ ब्रेन
प्रो. प्रसाद ने बताया कि काेविड के दौर में ब्रेन बचा नहीं है। कई मरीजों में ब्लड क्लॉटिंग होने की समस्या देखी गई है। ब्रेन में खून की नलियों या धमनियों में खून का थक्का बन जाता है। इसे स्ट्रोक कहते हैं। ऑक्सीजन की कमी से जो अंग सबसे ज्यादा प्रभावित हुआ है वह ब्रेन है। इससे दिमाग में कई तरह की समस्याएं आने लगी हैं। जितने लोगों को कोरोना का माइल्ड असर था उनमें से 50% लोगों के दिमाग पर असर पड़ा है।

टेस्ट कराएं तो पता चलेगा कितनी कम हुई याददाश्त
आपको नॉर्मली पता नहीं चलेगा कि याददाश्त कम हुई है। मगर, जब तक इसका मेडिकल टेस्ट नहीं किया जाता, तब तक असलियत पता नहीं चलेगी। प्रो. प्रसाद ने बताया कि इस समय वह विश्व स्वास्थ्य संगठन और इंटरनेशनल स्टडीज टेक्सास में डिमेंशिया पर स्टडी कर रहे हैं।

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