गया। बीपीएससी पास कर गया जिले के खिजरसराय प्रखंड ब्लॉक आफिस में बतौर राजस्व अधिकारी काम करने वाली ममता कुमारी ने मजदूर महिलाओं के जुझारूपन और उनकी पीड़ा को समझने के लिए उनके साथ धान की रोपनी की। इस काम के पीछे इस महिला अफसर का उद्देश्य कीचड़ से सने खेत में धान के पौधों की रोपनी करने वाली महिलाओं की पीड़ा और उनके जुझारूपन को खुद से अनुभव करना था।
दरअसल ममता कुमारी खिजरसराय प्रखंड के सोमरन बिगहा में जमीन विवाद का मसला सुलझाने गई थीं। सोमरन बिगहा गांव में जाने के लिए खेत की पगडंडियों से ही जाना पड़ता है। जमीन का मसला सुलझाने के बाद जब वह पंगडंडियों के सहारे वापस लौटने लगीं तो खेत में धान रोप रहीं महिलाओं को देख उनके अंदर भी धान रोपने की इच्छा हिलोरे मारने लगी तो वह भी धान रोपने के लिए कीचड़ से सने खेत में उतर गईं। करीब 15 मिनट तक उन्होंने धान के पौधे रोपे।
राजस्व अधिकारी ममता ने बताया कि जॉब में आने से पहले जब कभी खेतों में धान रोपती हुईं महिलाओं को देखती थीं तो धान रोपने की इच्छा होती थी। साथ में यह जानने की इच्छा होती थी कि आखिर ये मजदूर महिलाएं गंदे पानी में घुस कर और कमर को लगातार पांच घंटे तक बैंड कर कैसे काम कर लेती हैं। वास्तव में ये महिलाएं हम आम महिलाओं से हर मामले में ग्रेट हैं। इस कठिन काम के बीच बगैर ऊफ किए उनके चेहरे पर मुस्कुराहट तैरती ही रहती है।
राजस्व अधिकारी कीचड़ से सने खेत में नंगे पांव उतर कर धान रोपने लगीं तो उस खेत में धान रोप रहीं महिलाओं ने हंसते हुए कहा कि ‘मैडम रहने दीजिए आपका फ्रॉकवा गंदा हो जाएगा’, लेकिन उन्होंने न तो अपने पैरों की तनिक परवाह की और न ही अपने महंगे कपड़ों की।
उन्होंने करीब 15 मिनट तक झुुक कर लगातार धान के पौधे रोपे। ममता की लगन व धान रोपने की कोशिश को देख मजदूर महिलाओं को कहना पड़ा कि ‘मैडम तो बढ़िया से रोप रही हैं’। इस बीच एक शख्स ने यह भी कह दिया कि बढ़िया से मोरी रोपें मैडम, मजदूरी भी मिलेगी। पांच किलो चावल।
