धान के कटोरा बिक्रमगंज अनुमंडल कहे या फिर रोहतास जिले में पिछले वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष धान की रोपनी सरकारी आंकड़े के अनुसार 24 प्रतिशत कम हुई है। वही बरसात भी 229 एमएम कम हुआ है। दो-तीन दिनों से इंद्रदेव की मेहरबानी हुई है तो खेतों में किसान नजर भी आने लगे नहीं तो इक्का-दुक्का किसान पंपसेट एवं बोरिंग लगाकर धान रोपाई किया करते थे। बताते चलें कि इस वर्ष बरसात कम होने की वजह से नहर भी किसानों को साथ नहीं दिया। जिसकी वजह से नहरी इलाकों में भी धान रोपनी समय पर नहीं हो पाई है।
ऐसे में दूसरे राज्यों में एवं चावल सप्लाई करने वाले इस जिले में अभी स्थिति वैसे भी नहीं हुई है कि अपने पेट भरे जा सके। सावन माह में दो-चार दिन पहले आसमान से गिर रहे आग के गोले जेठ को भी फेल कर रहे थे। जिसकी वजह से पानी भी पताल पकड़ लिया था। किसानों के द्वारा सबसे पहले अपने बिचड़े को बोरिंग पंप सेंट एवं नहर के माध्यम से जिंदा किया जा रहा था। इसी दौरान कोई किसान अगर धान रोपाई कर दिया था तो वह भी अपना रोप जिंदा कर रहा था।
कृषि विभाग की मानें तो पिछले वर्ष 1 लाख 94000 हेक्टेयर धान की खेती का लक्ष्य माना गया था। जिसका 38% अब तक धान रोपनी हुआ था । इस वर्ष 2 लाख 5570 हेक्टेयर लक्ष्य निर्धारित है। जिसका 14 प्रतिशत ही जिले में धान रोपनी हो पाया है। सरकारी आंकड़ों पर भी नजर डाले तो पिछले वर्ष की अपेक्षा 24 प्रतिशत धान की रोपनी नहीं हो पाई है।
सच मायने में देखा जाए तो नहर का जाल होने के बावजूद भी रोहतास जिले में अब तक मात्र 14% धान रोपनी होना अकाल की छाया ही माना जा सकता है। वैसे बदले मौसम के बाद किसान धान रोपाई में लग गए हैं । देखना यह है कि लक्ष्य पूर्ण करते हैं या नहीं ।
दो-तीन दिन पूर्व से इंद्रदेव हुए मेहरबान तो किसान के रोप हुए धान के साथ साथ बिचड़े में भी जान आ गया। उसके बाद धान रोकने के लिए खेत तैयारी करने में लग गए हैं। वैसी पूरी तरह इस बरसात से धरती का प्यास तो नहीं बुझा है लेकिन किसी तरह किसान धान रोपनी करने के लिए मजबूर हैं। वैसे सरकारी आंकड़े भी पिछले वर्ष की अपेक्षा बहुत कम धान रोपनी की बात कर रहे हैं तो मौसम विभाग भी बारिश कम होने की बात से पीछे नहीं हट रहा है। ऐसे में सरकार के हुक्मरानों के द्वारा रोहतास जिले के किसानों को भी कुछ सहायता जरूर मिलनी चाहिए। क्योंकि नहर विभाग भी जितना पानी किसानों को देना चाहिए उतना दे नहीं पाया है।
