छपरा। किनारे से दूर जा चुकी सरयू नदी की धारा पुनः अपने स्थान की ओर आने लगी है। जिससे रिविलगंज नगर की पौराणिक, ऐतिहासिक, धार्मिक एवं व्यवसायिक पहचान फिर से स्थापित होने की संभावनाएं प्रबल होती नजर आ रही है।
पौराणिक काल में न्याय शास्त्र के प्रणेता महर्षि गौतम एवं श्रृगीं ऋषि आदि जैसे महान ऋषि मुनियों तपोस्थली गौतम स्थान रिविलगंज के लोगों में हर्ष का माहौल बन रहा है। पतित पावनी सरयु नदी किनारे बसा रिविलगंज के शहरी क्षेत्र नदी की पानी दुर चले जाने से इस धार्मिक नगरी का गौरवशाली इतिहास कि वर्तमान दृश्य धुधंला होने लगा था।
जिससे इस क्षेत्र के बड़े-बुजुर्गों, नवजवानों एवं समाजिक सरोकारी लोगों को अपनी जन्म भुमि कि पौराणिकता बचाने की चिंता दिलों दिमाग में घर करने लगी थी। रिविलगंज नगर क्षेत्र से विपरीत दिशा में बहती सरयू नदी की धारा एक तरफ सिताब दियारा के किनारे क्षेत्र में (सावन -भादो माह में) कटाव का कहर बरपाती है।
वहीं अनादि काल से हर साल कार्तिक पूर्णिमा, मकर संक्रांति एवं गंगा दशहरा आदि अवसरों पर सरयू नदी घाट पर लगने वाला धार्मिक एवं विशाल नहान मेला अपनी व्यापकता एवं पौराणिकता को बचाने के लिए जद्दोजहद कर रहा है। मौजूदा हालात पर नजर दौराने के बाद यह कहा जा सकता है कि प्रकृति की बेरुखी एवं सरकार के उदासीन पूर्ण रवैया से धार्मिक नगरी गौतम स्थान रिविलगंज की पौराणिक एवं धार्मिक इतिहास पर संकट के बादल मंडरा रहा है।
लेकिन इधर गत वर्ष से सरयु नदी की धारा के सही दिशा में बहाव शुरू होने से उम्मीद की नयी किरण दिखाई देने लगी है। लोगों का कहना है कि सरयु मईया की कृपा होगी तो फिर से रिविलगंज के खुशहाली के दिन जल्द बहुरेंगे। इससे किसानों को भी काफी राहत मिलने वाली है।
