नालन्दा जिला अंतर्गत बिहार शरीफ व्यवहार न्यायालय में बुधवार को एक हैरान कर देने वाला एक मामला सामने आया। हत्या के आरोपित पति-पत्नी ने कानून से बचने के लिए एक किशोर को फंसा दिया। कुछ रुपये की लालच देकर उसे कोर्ट में सरेंडर करवा दिया।

फर्जी जन्म प्रमाण पत्र और आधार कार्ड से उसे आरोपित साबित करने की कोशिश की गई। खुद, पति पत्नी किशोर के मौसा-मौसी बनकर कोर्ट में मिलने पहुंच गये। मृतक के भाई ने दोनों को पहचान लिया। इसके बाद जेजे बोर्ड के प्रधान दंडाधिकारी आशीष रंजन ने दोनों को हिरासत में लेकर बिहार थाना को सुपुर्द करने और उनपर एफआईआर करने का आदेश दिया है।

दरअसल हत्या का यह मुकदमा गिरियक थाना से जुड़ा हुआ है। 10 मई 2022 को बकरा गांव में इंद्रजीत कुमार की हत्या रवि केवट ने कर दी थी। अमरजीत कुमार ने रवि केवट व उसकी पत्नी सुलेखा देवी के खिलाफ एफआईआर करायी थी। रवि ने सजा से बचने के लिए एक किशोर को सरेंडर करवा दिया। भेद खुलने के बाद कोर्ट में ही रवि व सुलेखा को हिरासत में ले लिया गया है।

पेश किया फर्जी प्रमाण पत्र
वादी पक्ष के अधिवक्ता संजय कुमार ने बताया कि आरोपित रवि कार्यवाई से बचने के लिए रुपये का प्रलोभन देकर फर्जी प्रमाण पत्र के माध्यम से किशोर को रवि केवट बना दिया। 10 अगस्त को किशोर को सीजेएम कोर्ट में सरेंडर करवा दिया। आरोपित के नाबालिग होने के कारण मामले को किशोर न्याय परिषद में भेजा गया। वहां से किशोर को पर्यवेक्षण गृह भेज दिया गया। बुधवार को मामले में उसकी पेशी थी।
इधर, आरोपित रवि और सुलेखा मास्क लगाकर किशोर से मिलने के लिए कोर्ट पहुंच गये। मुकदमे की पैरवी के लिए मृतक का भाई अमरजीत भी कोर्ट आया हुआ था। मास्क हटाने पर अमरजीत ने पति-पत्नी को पहचान लिया और उन्हें जानकारी दी। जिसके बाद कोर्ट में आवेदन व साक्ष्य देकर इस बात की सूचना दी। इसके बाद कोर्ट ने दोनों को हिरासत में लेने का निर्देश दिया। जिसके बाद बिहार थाना पुलिस ने पति पत्नी को हिरासत में ले लिया।



