Bihar Politics: …तो अब ‘ऑफिशियली’ राजद का छोटा भाई बन गया जदयू !

पटना. बिहार में होनेवाले गोपालगंज और मोकामा विधानसभा उपचुनाव में महागठबंधन की ओर से राजद ने अपना उम्मीदवार दिया है. अब जदयू ने ऐलान किया है कि वह महागठंबधन के उम्मीदवारों का पूर्ण समर्थन करेगा. जदयू ने यह भी साफ किया है कि मोकामा से बाहुबली पूर्व विधायक अंनत सिंह की पत्नी नीलम देवी की उम्मीदवारी पर मतभेद के बावजूद जदयू पूरा समर्थन देगा.

lalu prasad wrote script for government change in bihar after meeting nitish  kumar ans | नीतीश कुमार और लालू यादव की मुलाकात के 30 दिन बाद बिहार में बदल  गई सत्ता, क्यामद्य निषेध एवं निबंधन विभाग के मंत्री सुनील कुमार ने जदयू और अनंत सिंह के रिश्ते पर कहा कि किसी का निजी मतभेद हो सकता है, लेकिन गठबंधन धर्म का पालन सबसे जरूरी है. जदयू ने गोपालगंज और मोकामा सीट पर महागठंबधन के उम्मीदवारों की जीत का दावा किया. हालांकि सियासत के जानकार जदयू के इस समर्थन को पार्टी की मजबूरी मान रहे हैं और इसके लिए बिहार की राजनीति में जदयू की कमजोर स्थिति को जिम्मेदार बता रहे हैं.

दरअसल, सोमवार को ही राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने अपने बेटे व राज्य के उपमुख्यमंत्री तेजस्वी यादव को बड़े फैसले लेने का अधिकार दिया और मंगलवार को बिहार विधानसभा उपचुनाव में मोकामा और गोपालगंज दोनों सीटों पर महागठबंधन की ओर से राजद ने अपने उम्मीदवारों की घोषणा कर दी. महागठबंधन में जेडीयू एक बड़ी पार्टी है, लेकिन उसे एक भी सीट नहीं मिली.

बता दें कि राजद ने मोकामा विधानसभा क्षेत्र से बाहुबली अनंत सिंह की पत्नी नीलम देवी और गोपालगंज सीट से मोहन गुप्ता को अपना उम्मीदवार बनाया है. गोपालगंज राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव का गृह जिला है. जाहिर है सियासत के जानकार सवाल उठा रहे हैं कि क्या राजद से कम विधायकों की संख्या वाले जदयू के नीतीश कुमार को सीएम पद देने की कीमत इस तरह से वसूल रही है.

दरअसल, पिछले विधानसभा चुनाव को देखें तो यह सीट कांग्रेस के खाते में जानी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. अब तो कांग्रेस भी सरेंडर बोल गई है. कहा तो यही जा रहा है कि महागठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी राजद है और यह सरकार भी नंबर के हिसाब से ही चल रही है. राजद ने राज्य को जेडीयू का सीएम (नीतीश कुमार) देकर पूरी कीमत वसूल की है और यह भी बता दिया है कि अब बिहार की राजनीति में जदयू से बड़ा कद राजद का है.

यहां यह भी बता दें कि मंगलवार को राजद दफ्तर में सहयोगी दलों की उपस्थिति में पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी ने महागठबंधन के उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की थी. मांझी ने दावा किया कि महागठबंधन के सभी सात दलों ने सर्वसम्मति से इनके नाम पर मुहर लगाई. दोनों सीटों पर 3 नवंबर को चुनाव होने हैं जबकि 6 नवंबर को परिणाम आएगा.

सियासत के जानकार अपनी बातों को पुष्ट करने के पक्ष में एक और तर्क देते हैं कि कैसे बिहार की राजनीति में राजद ही अब जदयू का बड़ा भाई है? दरअसल, हाल में राजद के नई दिल्ली में आयोजित पार्टी के सम्मेलन में लालू यादव ने खुद कहा था कि उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से कहा था कि मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद बिहार में राजकीय शोक घोषित करें और सीएम नीतीश ने उनकी बात मानी भी.

 

 

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