पूर्णिया. सुहागिन महिलाओं के लिए करवा चौथ का सबसे खास होता है. हिंदू पंचांग के अनुसार कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को करवा चौथ मनाया जाता है. पूर्णिया में इस बार मिथिला पंचांग के अनुसार समय और प्रभाव की जानकारी आपको मिलेगी. पूर्णिया में मिथिलांचल के पंडित और ज्योतिषाचार्य पंडित मुन्ना झा ने बताया व्रत मिथिला पंचांग अनुसार बुधवार रात्रि 02 :15 AM बजे से शुरू होकर गुरुवार रात्रि 03 : 09 AM बजे मिनट पर समाप्त हो जाएगा. वहीं हिंदू धर्म में कोई भी व्रत त्यौहार सूर्योदय के तिथि पर की जाती है. इसलिए इस बार करवा चौथ 13 अक्टूबर को ही मनेगा.
शुभ मुहूर्त पर चंद्रमा का दर्शन कर तोड़े व्रत
पंडित ने बताया कि करवा चौथ में सुहागिन सुबह से व्रत का संकल्प लेते हुए शाम को शुभ मुहूर्त पर चंद्रमा के दर्शन कर पूजा पाठ कर व्रत तोड़ती है. सुहागिन एक जगह एकत्रित होकर करवा चौथ व्रत की कथा सुनती हैं. इसके बाद चांद का दर्शन करते हुए उपवास तोड़ती है. इस बार करवा चौथ व्रत विशेष महत्व है.

करवा चौथ चतुर्थी तिथि
चतुर्थी तिथि आरंभ 13 अक्टूबर 2022 को रात्रि के 2 बजकर 15 मिनट पर चतुर्थी तिथि का समापन 14 अक्टूबर को सुबह 3 बजकर 09 मिनट पर होगा.
पूजा का शुभ मुहूर्त
पंडित और ज्योतिशाचार्यं के अनुसार इस बार करवा चौथ पूजा के लिए शुभ मुहूर्त बन रहा है. पूजा करने का शुभ मुहूर्त शुभ समय संध्या 7 बजकर 50 मिनट से शुरू होकर रात्रि 9 बजकर 50 मिनट तक रहेगा. इस समय की पूजा ज्यादा फलदायी होगी.इस पर्व को मिथिलांचल भाषा में करक चतुर्थी या श्री कृष्ण पिनगाक्ष चौथ भी कहा जाता है. करवा चौथ कार्तिक कृष्ण पक्ष चतुर्थी तिथि को कृतिका नक्षत्र सिद्धि योग मे होने जा रहा है.

चंद्रोदय का समय 8.45 बजे
करवा चौथ पर चंद्रोदय का समय भारतीय समयानुसार मिथिलांचल में चंद्रोदय का समय 8.45 बजे होगा. सुहागिन महिलाएं पूजा कर चंद्रमा का दर्शन कर गाय के कच्चा दूध या पानी गंगाजल से चंद्रमा को अर्ध्य देकर क्षमा प्रार्थना करें. चालन में अनंत छिद्र से होकर गुजरने वाली नज़रे पति की लंबी उम्र की कामना करती है. उन्होंने बताया कि इस बार का समय सुहागिन के लिए बहुत शुभ है.


