समस्तीपुर. बिहार के समस्तीपुर में एक ऐसा चौक है जिसके सामने से गुजरते ही गाड़ियां खुद ब खुद रुक जाती हैं. अरे डरिए मत… आपको बताते हैं आखिर क्यूं. समस्तीपुर जिला मुख्यालय से करीब 14 किलोमीटर दूर मुसरीघरारी-वैशाली मुख्य मार्ग पर है पेड़ा चौक. यहां का पेड़ा काफ़ी फेमस है. इतना की आस्ट्रेलिया, इंग्लैंड, पाकिस्तान, बिहार, दिल्ली और मुंबई के लोग भी इसका स्वाद चख चुके हैं. क्योंकि यहां के पेड़ा की शुद्धता और बनाने का तरीका आज भी कुछ खास है. इसके कारण बिहार सहित देश विदेश के लोग इसके स्वाद के दीवाने हैं. इस रास्ते से गुजरने वाले प्रत्येक वाहनों की चाल पेड़ा चौक पर खुद धीमी हो जाती है. अगर आप समस्तीपुर आएं तो आप पेड़ा चौक के पेड़ा का स्वाद जरूर चखें.
जानिए आखिर क्यूं है इतना फेमस
दुकानदार मुकेश झा उर्फ मुन्ना ने बताया कि मेरी दुकान 1990 से यहां स्थित हैं. यहां के पेड़े बनाने की अपनी अलग खासियत है. 70 किलो दूध का पेड़ा बनाने में करीब 5 से 6 घंटे का समय लगता है. यहां गैस पर नहीं बल्कि मिट्टी के चूल्हे में कोयला का इस्तेमाल होता है. पहले दूध को कढ़ाई में रख कर जलाया जाता है. जब दूध काफी जल जाता है, तो फिर इसमें 2 से 3 केजी चीनी डाली जाती है. जिससे पेड़ा का स्वाद बदले नहीं और पेड़ा स्वादिष्ट बने. पेड़ा चौक पर बनने वाले पेड़ा की शुद्धता के कारण लोग पेड़ा का स्वाद नहीं भूल पाते है. इस पेड़ा की खासियत यह है की एक महीने के बाद भी यह खराब नहीं होता है.
इन देश के लोग हो चुके हैं पेड़ा के दीवाने
पेड़ा दुकानदार संचालक मुकेश कुमार उर्फ मुन्ना झा ने बताया पेड़ा चौक के पेड़ा का स्वाद बिहार के तमाम जिले एवं दिल्ली, मुंबई सहित ऑस्ट्रेलिया, इंग्लैंड व पाकिस्तान के लोग भी यहां के पेड़ा का स्वाद चख चुके हैं. उन्होंने बताया कि यहां के लोग जो दूसरे देशों में रहते थे, वह अपना व्यापार बढ़ाने के लिए यहां का पेड़ा विदेशियों के लिए ले जाया करते थे. वे इस पेड़ा का स्वाद चखा कर अपना व्यापार बढ़ाया करते थे. जिसके कारण ऑस्ट्रेलिया इंग्लैंड व पाकिस्तान के लोग यहां के पेड़ा का मांग करने लगे. वहीं बिहार घूमने जो टूरिस्ट आते थे, वो अपने साथ स्पेशल पेड़ा ले जाते थे. परंतु कोरोना के बाद विदेशों में फिर आज आना बंद हो गया है. जिसके कारण व्यापार पर भी इसका बुरा असर पड़ा है. विदेश में यहां का पेड़ा 500 ₹ प्रति किलो की दर से बिकता है.
एक महीने में करोड़ का होता है कारोबार
पेड़ा दुकान संचालक मुकेश झा उर्फ मुन्ना झा ने बताया कि प्रत्येक दिन यहां पर करीब 10 से 15 क्विंटल पेड़ा का बिक्री होता है. बिहार में बिकने वाले पेड़ा का 1 किलो का कीमत 350 रुपया है. जबकी विदेशों में यह पेड़ा 500 रुपया प्रति किलो की दर से बिकता है. वहीं अगर महीने की बात करें तो एक महीना में करीब 1 करोड़ से अधिक का व्यापार यहां पेड़ा का होता है. कोरोना के बाद व्यापार में काफी गिरावट आने के कारण दुकानदार बड़े पैमाने पर अब पेड़ा की बिक्री नहीं कर पा रहे हैं.

ऐसे पड़ा पेड़ा चौक का नाम
पेड़ा दुकानदार ने बताया कि वर्ष 1965 में पहली बार सरैया चौक पर कैलाश बिहारी के द्वारा पेड़ा की दुकान सजाई गई थी. जिस समय लोग पेड़ा चौक को सरैया के नाम से जानते थे. काफी दिनों तक लोग इस जगह को सरैया चौक के नाम से ही जानते थे. फिर वर्ष 2016 में एक टेलकम कंपनी के अधिकारी इस रास्ते से गुजर रहे थे. परंतु मेरे के स्वाद ने अधिकारियों के गाड़ी की रफ्तार को धीमी कर दी. जिसके बाद उस अधिकारी ने वहां पर रुक कर पेड़ा का स्वाद चखा. उस जगह से अवगत होना चाहे परंतु उस जगह का नाम सुनकर हैरत में रह गए. उसी दौरान उन्होंने वहां के लोगों को कहा कि इस जगह का नाम सरैया चौक नहीं बल्कि आज से इस जगह को पेड़ा चौक के नाम से जानेंगे.


