पटना हाईकोर्ट ने शराबबंदी कानून को लेकर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि इस कानून को उसकी वास्तविक भावना से लागू नहीं किया गया है। जिस कारण राज्य में कई तरह के नए अपराध बढ़ गए हैं। कोर्ट ने इस मामले को मुख्य न्यायाधीश के समक्ष पेश करने का आदेश हाईकोर्ट के निबंधक को दिया, ताकि इसपर वृहत रूप से सुनवाई की जा सके।

न्यायमूर्ति पूर्णेन्दु सिंह की एकलपीठ ने जमानत के कई मामलों की सुनवाई के बाद अपने 20 पन्नों के आदेश में आठ बिंदुओं पर चर्चा की। कहा है कि राज्य मशीनरी की विफलता के कारण प्रदेश के नागरिकों का जीवन जोखिम में है। राज्य के बाहर से शराब की तस्करी धड़ल्ले से हो रही है। नेपाल और कई पड़ोसी प्रदेश से राज्य में शराब की तस्करी हो रही है।
टैक्स चोरी के साथ-साथ इस धंधे में नाबालिगों को शराब परिवहन में शामिल किया गया है। शराब की तस्करी में नकली पंजीकरण वाले वाहनों का उपयोग हो रहा है। यही नहीं, चोरी के वाहनों का भी उपयोग हो रहा है। कई वाहनों का नंबर, इंजन नंबर और चेसिस नंबर के साथ छेड़छाड़ करने की शिकायत मिली है।

शराबबंदी और उसकी तस्करी पर लगाम लगाने के लिए तैनात अधिकारियों की लापरवाही सामने आई है। जांच अधिकारी तलाशी और जब्ती में कर्तव्य का पालन सही तरीके से नहीं कर रहे हैं। यहां तक कि अनुसंधान में कई खामियां पाई गई हैं। जिसका लाभ अभियुक्तों को मिलना तय है। ऐसे अधिकारियों पर सख्त कदम उठाने में राज्य सरकार विफल रही है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं किये जाने से उनका मनोबल बढ़ा हुआ है। प्रदेश में कई तरह की नशीली दवाओं और उसकी खपत में तेज वृद्धि हुई है। कोर्ट ने जब्त शराब को नष्ट करने के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे पर्यावरण संबंधी चिंताएं बढ़ गई हैं। कोर्ट ने इस कानून के निष्पक्ष कार्यान्वयन के लिए सरकार और उसके अधिकारियों को सच्ची भावनाओं के साथ बैठकें आयोजित करने की बात कही।



