पटना. बिहार सरकार में शामिल भाकपा माले (CPI-ML)ने अपनी ही सरकार पर लगातार निशाना साधा है और सरकार की नीतियों का जमकर विरोध किया है. भाकपा माले महासचिव दीपांकर भट्टाचार्य ने बिहार सरकार की नीतियों पर नाराजगी जाहिर करते हुए यह भी कहा कि जनता में असंतोष बढ़ता जा रहा है. जाहिर है महागठबंधन में सब कूल-कूल के दावों के बीच भाकपा महासचिव का यह बयान नीतीश कुमार और तेजस्वी यादव के माथे पर बल ला सकती है.
माले महासचिव दीपांकर भटाचार्य ने कहा, ”बिहार में महागठबंधन सरकार से एक नई उम्मीद जगी, लेकिन सरकार आम लोगों को लगातार निराश ही कर रही है. शिक्षकों की बहाली पर अब तक किसी भी प्रकार की कदम नहीं उठाया गया है. इसके खिलाफ युवाओं में लगातार आक्रोश देखा जा रहा है.” बिना वैकल्पिक आवास की व्यवस्था किए गरीबों को उजाड़े जाने पर भी माले महासचिव ने चिंता जाहिर की और कहा कि सरकार से वार्ता के बाद भी जगह जगह गरीबों की झोपड़ियां पर बुलडोजर चल रहे हैं.
माले महाजसचिव ने कहा, बिहार विधानसभा की दो सीटों पर हुए उपचुनाव में भी जनता की नाराजगी दिखी और गोपालगंज में महागठबंधन हार का सामना करना पड़ा. सरकार को इसके प्रति गंभीरता दिखानी चाहिए और जनता से किए वादों की पूरा करना चाहिए.

माले महासचिव ने कहा कि भाकपा-माले का 11 वां महाधिवेशन पटना में 15-20 फरवरी तक आयोजित होगा और 15 फरवरी को गांधी मैदान में लोकतंत्र बचाओ- देश बचाओ रैली का आयोजन होगा. वहीं बक्सर में आयोजित सनातन समागम का आयोजन पर भी निशाना साधा और धर्म के नाम राजनीति करने का आरोप लगाया. यह बेहद चिंतनीय है और इसके प्रति हम सबको सावधान रहना होगा.
गुजरात में होने वाले विधान सभा चुनाव में CPI-ML द्वारा कुल 5 विधान सभा क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारने की बात भी माले महासचिव ने कही. उन्होने बताया कि माले 4 आदिवासियों और 1 जेनरल कैंडिडेट को टिकट देगा. दीपांकर भट्टाचार्य ने EWS कोटे पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर कहा कि केंद्र सरकार द्वारा आरक्षण को खत्म करने की साजिश चल रही है. आरक्षण का प्रतिशत दिनोंदिन घटाया जा रहा है.


