भगवान भरोसे चल रहा सरकारी स्कूल, भवन के अभाव में मंदिर में पढ़ने को मजबूर छात्र

बिहार की बदहाल शिक्षा व्यवस्था किसी से छिपी नहीं है. आए दिन शिक्षा विभाग की कुव्यवस्था सामने आते रहती है. इसके बावजूद सरकार से लेकर जिला प्रशासन तक इसे लेकर उदासीन बने रहते हैं. गया जिला में स्कूल  भवन के अभाव में वर्षों से मंदिर में नौनिहालों का भविष्य गढ़ा जा रहा है. यह तश्वीर जिले के ग्रामीण इलाके के नहीं बल्कि शहरी क्षेत्र की है, जहां बच्चे जमीन पर बोरा बिछाकर पढ़ाई करने को मजबूर हैं.

Gaya: भगवान भरोसे चल रहा सरकारी स्कूल, भवन के अभाव में मंदिर में पढ़ने को मजबूर  छात्र - government school has not its building due to which students have  to attend classesदरअसल, गया शहर के केंदुई स्थित प्राथमिक विद्यालय बक्शुबिगहा वर्ष 1998 से संचालित है. बीते 24 साल के अंतराल में कई पदाधिकारी आए और गये, लेकिन किसी ने भी यहां के छात्रों के प्रति नहीं सोचा. नतीजतन आज भी इस विद्यालय के छात्र भवन के अभाव में जमीन पर बैठकर मंदिर में पढ़ाई करते हैं. एक से पांचवीं तक के इस सरकारी स्कूल में 107 बच्चे नामांकित हैं जिनके लिए दो महिला शिक्षक प्रतिनियुक्त किए गये हैं.

स्कूल के पास नहीं है अपनी ज़मीन

सरकारी विद्यालयों में शिक्षा के अधिकार का हनन किस कदर हो रहा है यह अंदाजा इस स्कूल की स्थिति से लगाया जा सकता है. विद्यालय भवनहीन ही नहीं, बल्कि भूमिहीन भी है. यहां के बच्चों को डेस्क-बेंच, ब्लैक बोर्ड, शौचालय और हैंडपंप जैसी बुनयादी सुविधाओं से कोई वास्ता नहीं है. यह मासूम कई साल से मंदिर की जमीन पर बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं.

शौचालय को लेकर होती है समस्या

प्राथमिक विद्यालय बक्शुबिगहा की चौथी क्लास की छात्रा नंदनी कुमारी ने न्यूज़ 18 लोकल को बताया कि स्कूल भवन नहीं होने के कारण मंदिर में पढ़ाई होती है. सबसे ज्यादा दिक्कत शौचालय को लेकर है. शौचालय नहीं रहने के कारण घर जाना पड़ता है. बैठने के लिए डेस्क-बेंच की व्यवस्था नहीं है. इसलिए जमीन पर बोरा बिछा कर पढ़ाई करते हैं. सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द स्कूल बनाए ताकि हमें पढ़ाई में परेशानी न हो.

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