भागलपुर शहर में आवारा कुत्तों ने आतंक मचा रखा है। उसके अचानक दौड़ पड़ने या काट लेने से प्रतिदिन दो से तीन लोग जख्मी हो रहे हैं। इससे राहगीर परेशान हैं। वे खासकर रात के वक्त अकेले सड़क पर चलने से डरने लगे हैं। शहर की शायद ही कोई सड़क व गली हो जहां इनका आतंक न हो। बच्चे जब घर से निकलते हैं तो घर के सदस्यों को डर सताता रहता है कि कहीं कोई कुत्ता उनपर हमला न कर दे।
एक आंकड़े के अनुसार शहर में पांच हजार से अधिक आवारा कुत्ते हैं। कुत्तों का आतंक सबसे अधिक भीखनपुर, मदंरोजा, परबत्ती, सराय, खलीफाबाग, वेराइटी, बरारी, खंजरपुर और नाथनगर क्षेत्र में है। भीखनपुर, ईशाकचक, मुंदीचक व परबत्ती आदि चौक पर दर्जनों कुत्तों का जमावड़ा लगा रहता है। रात में ये लोगों को अपना शिकार बनाते हैं। दो पहिया वाहन चालक हो या राहगीर आते-जाते समय कुत्ते उनपर हमला करने से नहीं चूकते। अचानक झपट जाने से वाहन चालक सड़क पर गिर जाते हैं।
कई लोगों के तो हाथ-पैर तक टूट चुके हैं। आवारा कुत्तों के भय से दो पहिया वाहन चालकों को गाड़ी की रफ्तार धीमी करनी पड़ती है। नगर निगम के पास इनसे निपटने की कोई योजना नहीं है। कमेटी का गठन सिर्फ कागजों पर आवारा कुत्तों की जनसंख्या नियंत्रण के लिए स्टेय डाग बर्थ कंट्रोल सोसाइटी का गठन भागलपुर नगर निगम में किया जा चुका है। इस सोसाइटी में नगर आयुक्त, जिला पशु पालन अधिकारी, एसपीसीए के प्रतिनिधि व पशु कल्याण संगठन के प्रतिनिधि हैं। लेकिन इस कमेटी का गठन सिर्फ कागजों पर हुआ है।
आवारा कुत्तों के आतंक से इन दिनों नाथनगर इलाके के लोगों में दहशत व्याप्त है। बीते शनिवार को बेलखोरिया पंचायत के गोलाहू गांव में तीन मासूम बच्चों को आवारा कुत्ते ने काटकर गंभीर रूप से जख्मी कर दिया था। उक्त कुत्ते को पकड़ने के लिए वन विभाग को लोगों ने सूचना दिया है। लेकिन अब तक वन विभाग ने कोई संज्ञान नहीं लिया है। ग्रामीणों में आक्रोश व्याप्त है। ग्रामीणों ने बताया कि उक्त कुत्ता अभी भी बगीचा में मंडरा रहा है। ग्रामीण खेत-खलिहान जाने से डर रहे हैं। बच्चे को तो एक दम घर से बाहर नहीं निकलने दे रहे हैं। ग्रामीणों ने बताया कि जिस कदर स्थानीय लोगों ने बताया की वन विभाग ने अगर कार्रवाई नहीं की तो किसी की जान भी जा सकती है।



