लहसुन उत्पादन में चीन को चुनौती देगा भारत, विज्ञानी जुटे नई किस्म के विकास में

नई दिल्ली:खाने को स्वादिष्ट बनाने से लेकर औषधीय जरूरतों में इस्तेमाल होने वाले लहसुन उत्पादन में अभी चीन का दबदबा है। चीन के इस दबदबे को भारत से कड़ी चुनौती मिलने वाली है। विज्ञानी अब लहसुन की ऐसी किस्म के विकास में जुटे हैं, जिसे खरीफ फसलों के मौसम में भी उगाया जा सके।

लहसुन के औषधीय गुण, जो इस बनाते हैं घरेलू नुस्ख़ों का चैम्पियन - Garlic's  magical benefits for stomach | फेमिना हिन्दीसिर्फ रबी के मौसम में की जाती है लहसुन की खेती

बता दें कि भारतीय बागवानी विकास एवं अनुसंधान प्रतिष्ठान की देखरेख में अभी खरीफ मौसम के लिए विकसित की जा रही किस्म का ट्रायल चल रहा है। ट्रायल के नतीजों से विज्ञानी काफी उत्साहित हैं। अभी देश में लहसुन की खेती रबी मौसम में ही की जाती है।

बाजार में मनमानी से होती है दिक्कत

गौरतलब है कि रबी मौसम में उत्पादित लहसुन की उपलब्धता पूरे वर्ष बनी रहे इसके लिए इसकी बड़ी मात्रा का भंडारण करना पड़ता है। अधिकांश किसानों के लिए भंडारण करना संभव नहीं होता है। ऐसे में वे इसे औने-पौने कीमत पर बेच देते हैं। कई बार जमाखोर इस स्थिति का लाभ उठाते हैं और बाजार में मनमानी करते हैं।

भंडारण से होता कीमतों में इजाफा

कृषि विज्ञानियों के मुताबिक इससे दो स्तरों पर नुकसान होता है। एक तो किसान को उत्पाद की सही कीमत नहीं मिल पाती और दूसरा उपभोक्ताओं को मनमानी कीमत पर लहसुन खरीदना पड़ता है, क्योंकि जितना समय लहसुन भंडार में रहेगा, उसका किराया मूल कीमत में जुड़ता रहेगा। यदि खरीफ के मौसम में लहसुन का उत्पादन शुरू हो जाए तो इससे न सिर्फ भंडारण की मजबूरी से निजात मिल जाएगी, बल्कि उपभोक्ता को भी सस्ता व गुणवत्ता युक्त लहसुन मिलता रहेगा।

अभी इस स्तर पर है शोध

राष्ट्रीय बागवानी विकास अनुसंधान प्रतिष्ठान के निदेशक डा. पीके गुप्ता बताते हैं कि अभी हमारे केंद्र के विज्ञानी जी 389 किस्म पर कार्य कर रहे हैं। देश के विभिन्न राज्यों में विभिन्न जलवायु परिस्थिति वाले क्षेत्रों में इसका ट्रायल चल रहा है। करीब 50 अलग-अलग जगहों पर इसका ट्रायल हो रहा है। ट्रायल के नतीजे सही आने के बाद इस किस्म को अनुमोदन के लिए भारत सरकार के समक्ष भेजा जाएगा। पीके गुप्ता का कहना है कि यदि हम सफल होते हैं तो यह लहसुन के क्षेत्र में एक तरह की क्रांति होगी। इसकी खासियत केवल खरीफ मौसम में लहसुन उत्पादन ही नहीं है, बल्कि यह रबी मौसम में उत्पादित लहसुन के मुकाबले करीब दो महीने कम की अवधि में तैयार होगा।

बागवानी फसल है लहसुन

पिछले कुछ वर्षों में देश में धान, गेहूं जैसी पारंपरिक फसलों के अलावा बागवानी फसलों (सब्जी-फल-मसालों) की खेती का रकबा तेजी से बढ़ा है। भारत में लहसुन को मसालों वाली फसलों की श्रेणी में रखा गया है। इसे कई व्यंजनों में मसाले के तौर पर प्रयोग किया जाता है। इसके इलावा इसमें कईं ऐसे तत्व हैं जिनका इस्तेमाल दवाइयों में होता है। इसमें प्रोटीन, फास्फोरस व पोटेशियम जैसे तत्व पाए जाते हैं। यह पाचन क्रिया में मदद करता है और मानव रक्त में कोलस्ट्राल की मात्रा को कम करता है।

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading