मुजफ्फरपुर : हाईकोर्ट के आदेश की अवमानना के मामले में बीआरए बिहार विश्वविद्यालय के कुलसचिव प्रो.रामकृष्ण ठाकुर को कार्यमुक्त कर परीक्षा नियंत्रक डॉ.संजय कुमार को प्रभार दिया गया है।
गोयनका कॉलेज सीतामढ़ी के रिटायर प्राध्यापक डॉ.रामजी प्रसाद ने इंसेंटिव इंक्रीमेंट के लिए हाईकोर्ट में याचिका दाखिल किया है। कोर्ट ने कई बार विश्वविद्यालय को नोटिस भेजा, लेकिन सुनवाई के दौरान कोई उपस्थित नहीं हुआ।
इस पर नाराजगी जताते हुए न्यायाधीश चक्रधारी शरण सिंह ने 23 नवंबर को कुलसचिव को तत्काल कार्यमुक्त करते हुए निलंबन पर विचार करने का आदेश दिया है।
कोर्ट के आदेश की कॉपी राजभवन को भेजने के साथ कुलपति को इस मामले में तत्काल कार्रवाई करने को कहा है। हाईकोर्ट की अवमानना मामले में प्रो.रामकृष्ण ठाकुर 30 नवंबर को हाईकोर्ट में उपस्थित होंगे।
कुलपति प्रो.हनुमान प्रसाद पांडेय ने बताया कि हाईकोर्ट के आदेश के अनुपालन में प्रो.ठाकुर को कुलसचिव के पद से कार्यमुक्त कर दिया गया है।
डॉ.संजय कुमार को प्रभारी कुलसचिव बनाया गया है। इस मामले में 30 नवंबर को हाईकोर्ट में सुनवाई की अगली तिथि है।

गोयनका कॉलेज सीतामढ़ी के रिटायर प्राध्यापक डॉ.रामजी प्रसाद विवि की अनदेखी के बाद हाईकोर्ट गए। दरअसल सर्विस पीरियड के दौरान पीएचडी करने वालों को इंसेंटिव इंक्रीमेंट का लाभ दिया जाना था। डॉ.रामजी प्रसाद ने भी इसके लिए आवेदन किया।
इस पर विचार नहीं करते हुए विश्वविद्यालय ने 42 शिक्षकों को इसका लाभ दे दिया। जब उन्होंने विवि से इस संबंध में जानकारी मांगी, तो कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद डॉ.प्रसाद हाईकोर्ट पहुंच गए।
बताया जाता है कि डॉ.रामजी प्रसाद की याचिका पर हाईकोर्ट में सुनवाई के लिए कई तारीख पड़ी, लेकिन विश्वविद्यालय की ओर से कोई पक्ष नहीं रखा गया।
यहां तक कि नौ महीने पहले कोर्ट की ओर से जारी आदेश के बाद भी विवि से कोई कोर्ट में उपस्थित नहीं हुआ, जिस कारण मामला अवमाननावाद में पहुंच गया। इस मामले को लेकर विश्वविद्यालय के लीगल सेक्शन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े हो रहे है।
