मुजफ्फरपुर : शहर के मोतीझील स्थित रामदयालु स्मारक भवन में बिहार विधानसभा के प्रथम अध्यक्ष रामदयालु सिंह जी की 79 वीं पुण्यतिथि मनायी गयी। इस अवसर पर स्मृति व्याख्यान का आयोजन किया गया। इसका विषय था संसदीय शासन व्यवस्था में विधानसभा अध्यक्ष की भूमिका।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए पूर्व विधानसभा अध्यक्ष व वर्तमान में नेता प्रतिपक्ष विजय कुमार सिन्हा ने रामदयालु बाबू को उच्च कोटि का राजनेता व मूल्यों के लिए समर्पित महामानव बतलाया।
विधानसभा अध्यक्ष के रूप में उन्होंने निरपेक्ष होकर सबों के साथ न्याय किया। यहीं नहीं जब द्वितीय विश्वयुद्ध में ब्रिटिश नीति के विरोध में वर्ष 1939 में कांग्रेस मंत्रिमंडल से इस्तीफा दे दिया तब रामदयालु बाबू ने इस्तीफा देने से इसलिए इनकार कर दिया कि वे अध्यक्ष होने के नाते अब कांग्रेस के सदस्य नहीं रहे।
नई पीढ़ी को रामदयालु बाबू के कृत्यों से सीख लेनी चाहिए। विधानसभा की गरिमा की रक्षा करने की जवाबदेही विधानसभा अध्यक्ष की होती है, उसे पक्ष और विपक्ष को समान भाव से देखना पड़ता है।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए पूर्व मंत्री सुरेश कुमार शर्मा ने कहा कि अगले वर्ष रामदयालु बाबू की प्रतिमा का अनावरण किया जाएगा। संस्था के कोषाध्यक्ष ललितेश्वर प्रसाद सिंह ने अतिथियों का स्वागत किया वहीं रवींद्र प्रसाद सिंह ने धन्यवाद किया।
मंच का संचालन प्रो.अरुण कुमार सिंह ने किया। कार्यक्रम को अन्य लोगों के अलावा पूर्व विधायक केदार प्रसाद, पूर्व विधान पार्षद प्रो.नरेंद्र प्रसाद सिंह, डॉ. तारन राय, डॉ संजय पंकज, डॉ वंदना विजय लक्ष्मी, हरिराम मिश्रा, एच० एल० गुप्ता, मोहन प्रसाद सिंह ,उमेश पांडेय, चंद्रिका पांडेय, डॉ केसी सिन्हा,
अविनाश कुमार,साकेत सुमन, सुनीता साहनी, मंजू सिंह, डॉ संगीता सिंह, पूनम वर्मा,श्री वीरेंद्र प्रसाद सिंह, डॉ भारद्वाज, रविंद्र प्रसाद सिंह, प्रणव भूषण मोनी, आनंद प्रकाश मंटू, रंजन कुमार ओझा, आनंद कुमार सिंह, बसंत कुमार मिश्रा, लक्ष्मी नारायण सिंह, सी पी सिंह, अमिताभ कुमार, डी. झा, सत्यप्रकाश भारद्वाज ने संबोधित किया।








