चिकित्सकों के नहीं रहने के कारण गर्भस्थ शिशु की मौ’त पर सबका वेतन रो’का

मुजफ्फरपुर। सदर अस्पताल में इलाज के लिए आई प्रसूता के गर्भस्थ शिशु की जा’न चली गई तब पता चला कि 18 दिनों से महिला चिकित्सक आई ही नहीं थीं। इस बीच उनकी गै’रहाजिरी की रिपोर्ट प्रबंधक ने सिविल सर्जन कार्यालय को नहीं दी। इसके साथ ही 24 नवंबर को मातृ-शिशु सदन में तीन महिला चिकित्सक गा’यब रहीं।

चिकित्सकों के नहीं रहने के कारण ग’र्भस्थ शिशु की मौ’त पर सबका वे’तन रो’क दिया गया है। सिविल सर्जन ने कहा कि 24 नवंबर को एक प्रसूता सदर अस्पताल आईं थीं। उसके स्वजन ने आ’रोप लगाया कि केवल नर्स के सहारे इलाज हुआ। इसपर उपाधीक्षक डा.एनके चौधरी ने अपनी रिपोर्ट सीएस को दी है। सिविल सर्जन ने कहा कि कोई चिकित्सक बिना अवकाश लिए अगर एक दिन भी नहीं आता है तो इसकी रि’पोर्ट होनी चाहिए।

उपाधीक्षक डा. एनके चौधरी ने जो अपनी जां’च रिपोर्ट सीएस को दी है उसमें लिखा है कि 24 नवबंर की रात्रि में एक ग’र्भवती महिला आई थी। उसे सात माह का गर्भ था। मातृ-शिशु सदन में उस दिन रात्रि में महिला चिकित्सक डा. मोनिका जायसवाल की ड्यूटी थी, लेकिन वह अपनी ड्यूटी में मौजूद नहीं थी।

उस रात्रि में उन्हें फोन भी किया गया, लेकिन उन्होंने फोन रिसिव नहीं किया। इस कारण मरीज को नहीं देखा गया। दिन की ड्यूटी डा. प्रिया प्रीतम की थी। वह भी अपनी ड्यूटी पर नहीं आई थी। उस दिन दिन की पाली में जो गर्भवती महिलाएं आईं, वे बिना इलाज के ही वापस लौट गईं।

वहीं रोस्टर में डा. रश्मि रेखा का नाम था। वह भी बिना छुट्टी लिए पिछले 18 दिनों से गायब थीं। इस तरह से तीनों की लापरवाही की रिपोर्ट दी है। सिविल सर्जन डा.यूसी शर्मा ने कहा कि उपाधीक्षक की रिपोर्ट की समीक्षा होगी।

उसके बाद रिपोर्ट मुख्यालय तक जाएगी। अस्पताल प्रबंधक को बार-बार चे’तावनी के बाद का’र्यशैली में सु’धार नहीं हो रहा है। इसके कारण सदर अस्पताल की व्यवस्था बे’पटरी है। इसकी जानकारी भी वरीय अधिकारी को दी जाएगी।

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