नई दिल्ली: जिला जज के चैंबर में कथित मारपीट के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को निर्देश दिया है कि वह पुलिस अधिकारी की शिकायत पर स्वतंत्र रूप से निर्णय लें और जिला जज के चैंबर में मारपीट के आरोप वाली पुलिस अधिकारी की शिकायत पर विचार करें. मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि चीफ जस्टिस को न्यायिक अनुशासन के महत्व को ध्यान में रखते हुए फैसला करना चाहिए.
जस्टिस एमआर शाह और सीटी रवि कुमार की बेंच ने पुलिस अधिकारी गोपाल कृष्ण और अन्य की याचिका पर सुनवाई के बाद यह आदेश दिया. जिला जज के चैंबर में मारपीट के आरोप वाली शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर आरोप सही है तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है. दरअसल, याचिकाकर्ता ने पटना हाईकोर्ट के 31 अगस्त के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें एडीजे अविनाश कुमार के खिलाफ दायर शिकायत में लगाई गई क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया गया था.
दीपक राज नाम के व्यक्ति की पत्नी उषा देवी ने शिकायत दर्ज कराकर आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता, जो घोघरडीहा थाने के एसएचओ थे, ने उनको और उनके परिवार के अन्य सदस्यों को झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी थी. याचिकाकर्ता के अनुसार, 18 नवंबर 2021 को एडीजे अविनाश कुमार के कमरे में उन्हें बुलाया गया था. कमरे के अंदर उनको अपमानित किया गया और गाली-गलौज की गई थी. याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि दीपक राज और कोर्ट के अन्य अधिकारियों ने पीटा था. जान बचाने के लिए खुद को बाथरूम में बंद कर लिया था. शरीर से खून बह रहा था और वर्दी फटी हुई थी.
एडीजे के खिलाफ एफआईआर 20 जून को काफी देर से दर्ज की गई, जबकि घटना के बाद नवंबर 2021 में एडीजे अविनाश कुमार ने याचिकाकर्ता के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसके आधार पर उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया. जून में उन्हें जमानत मिली. याचिकाकर्ता ने जो एफआईआर दर्ज कराई थी, उसे हाईकोर्ट में चुनौती दी गई.

AIMIM ने स्थानीय गुलाम मुर्तजा अंसारी को मैदान में उतारा था जो अंसारी बिरादरी से आते हैं. MIM को उम्मीद थी की गोपालगंज वाला खेल कुढ़नी में भी करेंगे, लेकिन वो सफल होती नहीं दिखी. मुस्लिम वोटर बड़ी संख्या में महागठबंधन में जाते दिखे. MIM के उम्मीदवार ने अंसारी वोट काटा और कुछ जगहों पर अन्य मुस्लिम वर्गों के भी वोट मिले. लेकिन, वो उतने नहीं हैं जो महागठबंधन को नुकसान पहुंचा सके. यहां यह भी बता दें कि मुस्लिम वोटों में बिखराव न हो इसको लेकर महागठबंधन के मुस्लिम नेताओं ने काफी मेहनत भी की थी. हालांकि, यह भी हकीकत है कि कुढ़नी में मुकाबला बेहद कड़ा है और ऐसे में कुछ हजार वोटों का नुकसान भी महागठबंधन की उम्मीदों को झटका लगा सकता है.



