पटना : बीपीएससी अभ्यर्थी 67वीं पीटी के रिजल्ट के बाद से आं’दोलन कर रहे हैं। इनकी मुख्य मांग है कि जिन 9 प्रश्नों के उत्तर बदले गए हैं उनको हटाकर उसी अनुसार कट ऑफ निर्धारित कर और रिजल्ट दिए जाएं। आयोग एक प्रश्न के हिंदी और अंग्रेजी शब्दों को आधार बनाकर एक प्रश्न हटाकर 15 और रिजल्ट दे चुका है।
अभ्यर्थियों का सवाल है कि आखिर पीटी की परीक्षा में बीपीएससी 150 वैसे प्रश्न भी ठीक से क्यों नहीं पूछ पाता जिसके सही उत्तर उसे मालूम हों? क्यों आपत्ति के बाद उत्तर बदले जा रहे हैं? ऐसा कमोबेश हाल की कई संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा की पीटी में दिखा है।
हालांकि, 29 नवंबर को जब अभ्यर्थियों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव किया तो उसके बाद बिहार सरकार के चीफ सेक्रेटरी आमिर सुबहानी के साथ छात्र नेता दिलीप कुमार की वार्ता हुई। तब लगा कि अभ्यर्थियों की मांग पर सरकार विचार करेगी !
लेकिन जब इस वार्ता का कोई नतीजा कई दिनों के बाद सामने नही आया तो एक बार फिर अभ्यर्थियों का आ’क्रोश भ’ड़का और 7 दिसंबर को ये सड़क पर उतरे। अभ्यर्थी ये लड़ाई सड़क पर आंदोलन करके ही जीतना चाहते हैं। वजह ये कि हाल के वर्षों में कोर्ट के ज्यादातर फैसले सरकार के पक्ष में दिखे हैं।
बता दें कि बिहार लोक सेवा आयोग की 67 वीं पीटी की परीक्षा 8 मई को हुई थी। इसमें प्रश्न पत्र लीक हो गया था और सभी सेंटर्स की परीक्षा रद्द कर देनी पड़ी थी। इसके बाद आयोग ने 30 सितंबर को पीटी परीक्षा ली। इसमें नौ प्रश्न ऐसे पूछे गए जिसके उत्तर आपत्ति लेने के बाद बदल दिए गए।
इस बार कट ऑफ भी काफी ऊंचा गया। जनरल कैटोगरी का कट ऑफ 113 तक गया। इसके बाद से ही गुस्सा भड़का हुआ है। छात्र ये सवाल भी पूछ रहे हैं कि 67 वीं पीटी में एससी और इबीसी कैटोगरी का रिजल्ट कम क्यों ? छात्र E ऑप्शन को हटाने की मांग भी कर रहे हैं कि इसमें दो ऑप्शन दे दिए जाते हैं।
7 दिसंबर को हुए आंदोलन के बाद एक बार फिर से सरकार की ओर से आंदोलन कर रहे अभ्यर्थियों को आश्वासन मिला है। CMO के उपसचिव मनोज कुमार से वार्ता हुई।
जानकारी है कि उन्होंने रात में एक बार फिर छात्र नेता दिलीप कुमार से बात की है। अभ्यर्थी इसकी मांग भी करते रहे हैं कि मुख्यमंत्री छात्रों का मांगों पर विचार कर समाधान दें। लेकिन अगर आश्वास का फिर से वही हाल हुआ जो चीफ सेक्रेट्री के साथ वार्ता के बाद हुआ है तो आंदोलन की आग और तेज होने की आशंका है।

