पटना : बिहार के सत्ताधारी महागठबंधन में क्या सब कुछ ठीक नहीं चल रहा? आरजेडी और जेडीयू के बीच क्या दूरियां बढ़ने लगी हैं? ये सवाल सोमवार को सामने आए एक घटनाक्रम से उठे हैं। हुआ ये कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को एक बैठक की। ये विभागीय बैठक थी लेकिन जिसमें उस विभाग के मंत्री ही शामिल नहीं थे। जानकारी के मुताबिक, धान अधिप्राप्ति को लेकर सीएम ने समीक्षा बैठक की थी। जिसमें आरजेडी कोटे के दो मंत्रियों को भी शामिल होना था। हालांकि, मुख्यमंत्री ने अधिकारियों के साथ अकेले ही बैठक कर ली। बिना आरजेडी मंत्रियों के हुई इस मीटिंग को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया।
विभागीय बैठक में क्यों नहीं पहुंचे मंत्री?
बताया जा रहा कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार को धान खरीद को लेकर जो बैठक की, वो तीन विभागों से जुड़ा था। इसमें कृषि, सहकारिता और खाद्य विभाग के मंत्रियों को शामिल होना चाहिए था। हालांकि, मुख्यमंत्री ने सिर्फ अधिकारियों के साथ ही बैठक कर ली। ऐसा कहा जा रहा कि मंत्रियों को बैठक की सूचना ही नहीं दी गई थी। सवाल इसलिए भी उठ रहे क्योंकि कृषि और सहकारिता विभाग आरजेडी के पास है। खाद्य विभाग जरूर जेडीयू के खाते में है। हालांकि, तीनों ही विभागों के मंत्री सीएम की बैठक में मौजूद नहीं थे।
आरजेडी-जेडीयू में क्या सबकुछ ठीक है?
इस सियासी घटनाक्रम के बाद सवाल उठ रहे कि क्या मुख्यमंत्री अब आरजेडी के मंत्रियों से दूरी बना रहे? इसी वजह से उन्होंने विभागीय मीटिंग बिना मंत्री के अधिकारियों के संग ही कर ली। बिहार में कृषि विभाग सुरेंद्र यादव के पास है। खाद्य आपूर्ति मंत्री लेसी सिंह के पास है। सहकारिता मंत्रालय कुमार सर्वजीत के पास है। हालांकि, आरजेडी ही नहीं जेडीयू कोटे के मंत्री भी इसमें शामिल नहीं थे। जिसको लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है।
रामचरितमानस पर घमासान… दिल्ली में कुशवाहा
ये पूरा घटनाक्रम इसलिए भी अहम है क्योंकि पहले ही बिहार के शिक्षा मंत्री प्रोफेसर चंद्रशेखर के रामचरितमानस पर दिए बयान को लेकर हल्ला मचा हुआ है। जेडीयू ने आरजेडी नेतृत्व पर फैसला छोड़ा है। खुद ललन सिंह ने कहा कि जेडीयू सभी धार्मिक ग्रंथों का पूरी तरह आदर करती है। वहीं मंत्री चंद्रशेखर के कमेंट को लेकर फैसला आरजेडी नेतृत्व पर छोड़ा है। दूसरी ओर, जेडीयू संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष उपेंद्र कुशवाहा ने इस मुद्दे पर दो टूक शब्दों में कार्रवाई की मांग की थी। उन्होंने आरजेडी के कुछ लोग बीजेपी की पिच पर बैटिंग कर रहे। यही नहीं उन्होंने आरजेडी नेतृत्व से इस पर जल्द फैसले की मांग की थी।
अचानक जेडीयू दफ्तर क्यों पहुंचे सीएम नीतीश?
यही नहीं बिहार के सीएम नीतीश कुमार सोमवार को ही अचानक जेडीयू दफ्तर भी पहुंचे थे। इसकी जानकारी जैसे ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाहा को हुई तो वो तुरंत लगभग भागते हुए मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे। इसके बाद मुख्यमंत्री ने पार्टी नेताओं संग बैठक भी की थी। मुख्यमंत्री इस दौरान जेडीयू ऑफिस का दौरा किया साथ ही उन्होंने पेड़-पौधे लगाने और साफ-सफाई के निर्देश दिए। भले ही उनका ये स्टेप सामान्य लग रहा, लेकिन सियासी गलियारे में चर्चा है कि मुख्यमंत्री कहीं कुछ नया दांव तो चलने की तैयारी नहीं कर रहे? ये सवाल इसलिए भी उठ रहे क्योंकि उपेंद्र कुशवाहा भी दिल्ली आए हुए हैं।

