कोरोना बाद 2.95 लाख सीबीएसई छात्रों ने बिहार बोर्ड में लिया दाखिला

बिहार : कोरोना काल के बाद सीबीएसई से दसवीं करनेवाले 295791 विद्यार्थियों ने बिहार बोर्ड में दाखिला लिया है। पिछले तीन वर्षों में यह आंकड़ा लगातार बढ़ता जा रहा है। बिहार बोर्ड की मानें तो 2020 में सीबीएसई से 85353 तो 2021 में 100438 छात्रों ने दाखिला लिया। वहीं 2022 में 110000 विद्यार्थी सीबीएसई से बिहार बोर्ड में शिफ्ट हुए। सीबीएसई के अलावा आईसीएसई व अन्य राज्य बोड़ों से इस दौरान 77878 विद्यार्थियों ने बिहार बोर्ड के इंटर में दाखिला लिया। कोरोना के बाद लगातार हर साल सीबीएसई के साथ अन्य बोर्ड से छात्र बिहार बोर्ड की तरफ बड़ी संख्या में शिफ्ट हो रहे हैं।CBSE की तरह अब बिहार बोर्ड भी देगा स्टूडेेंट्स को बंपर मार्क्स, जानिए वजह -  Bihar government school students also get marks like CBSEकोरोना काल के पहले वर्ष 2018 में सीबीएसई से 55048 छात्रों ने बिहार बोर्ड में 11वीं में नामांकन लिया था। 2019 में यह संख्या 65135 थी। कोरोना काल के पहले के मुकाबले पिछले तीन वर्षों में दूसरे बोर्डों की छोड़कर बिहार बोर्ड में नामांकन लेने वालों की संख्या काफी बढ़ी है। बिहार बोर्ड से प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण छात्रों को राज्य सरकार द्वारा दस- दस हजार की छात्रवृत्ति दी जाती है।

इसके अलावा टॉप-10 में स्थान प्राप्त करनेवाले छात्रों को लैपटॉप के अलावा एक लाख से 50 हजार रुपए तक छात्रवृत्ति मिलती है। स्कूल या कॉलेज में नामांकन फीस भी कम लगता है। दूसरे बोर्ड से बिहार बोर्ड में आने का यह एक बड़ा कारण है। इसके अलावा भी राज्य सरकार छात्र-छात्राओं के लिए कई तरह की प्रोत्साहन योजनाएं चला रही है।

सीबीएसई छोड़ने का मुख्य कारण
■ स्कूल में ट्यूशन फीस जरूरत से ज्यादा होना
■ नामांकन के लिए स्कूल का चक्कर लगाना
■ नामांकन की व्यवस्था ऑनलाइन नहीं होना
■ दो साल के सत्र में बीच-बीच में कई तरह के शुल्क वसूलना
■ बोर्ड द्वारा हर साल सिलेबस में बदलाव करना

 

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