पटना: हर महीने में कृष्ण पक्ष के अष्टमी तिथि को कालाष्टमी तिथि के रूप में मनाया जाता है.आज कालाष्टमी तिथि मार्गशीर्ष के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भगवान भैरव की जयंती मनाया जाता है. भगवान भैरव भगवान शिव का ही स्वरूप हैं. पौराणिक कथा के अनुसार ब्रह्मा जी ने भगवान शिव का अपमान किया और अपने अहंकार में मुख से भगवान महादेव को अपशब्द बोले, जिसके बाद भगवान महादेव शंकर ब्रह्मा जी पर क्रोधित हो गए और गुस्से में आकर भैरव भगवान के रूप अवतरित हुए और ब्रह्मा जी का पांचवा सर काट दिए.भगवान भैरव रक्षा के देवता हैं
तब से ब्रह्मा जी का सिर्फ चार सर ही रहता है, यह भैरव भगवान के अवतरण का कहानी है. प्रत्येक कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को भैरव जी का पूजा पाठ किया जाता है. रात्रि जागरण भी किया जाता है इससे बहुत फायदा होता है कहा जाता है भगवान भैरव रक्षा के देवता हैं, जो भैरव की पूजा करता है उसे किसी भी प्रकार का कष्ट नहीं होता है. राहु केतु शनि का कोई भी नेगेटिव प्रभाव उसके जीवन पर नहीं पड़ता है. इसीलिए इसका विशेष महत्व है इस दिन भैरव का स्तुति पाठ मंत्र जाप जागरण इत्यादि निश्चित करना चाहिए.
घर में सुख शांति समृद्धि की होगी प्राप्ति
भैरव जी का पूजा करने से जीवन सफल होता है और किसी भी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है. चाहे वह आर्थिक हो या ग्रह दोष हो हर प्रकार का समस्या दूर होती है. भैरव बाबा का भी विशेष रूप से पूजा किया जाता है. उन्होंने बताया कि कालाष्टमी के दिन यानी आज जो लोग काले कुत्ते को खिलाएंगे, उससे भैरव बाबा खुश होंगे और घर में सुख शांति समृद्धि की प्राप्ति होगी. आज किसी मंदिर में भैरव बाबा के स्थान पर जाकर पूजा अर्चना कर दीपक भी जलाएं. दीपक करू तेल का जलाया जाए. जिससे कि जीवन में अंधकार का सामना नहीं करना पड़ेगा हर क्षेत्र में उजाला ही उजाला रहेगा.