बिहार के मुजफ्फरपुर में मुआवजे के चार लाख रुपये के लिए रिश्तों का अलग-अलग रूप देखने को मिल रहा है। बेटे की मौत के बाद बूढ़ी मां खुद को पहली दावेदार बता रही है। वहीं, एक तरफ पत्नी है, जो दूसरी शादी कर जिंदगी में आगे बढ़ चुकी है, लेकिन अब फिर से विधवा बनने को तैयार है।
मामला गायघाट प्रखंड के राघोपुर की है। यहां रहने वाले विपत सहनी की साल 2020 में दरभंगा जिले के बिठौली चौक स्थित हाइवे पर सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। उसकी पत्नी अंजली देवी ने आश्रित के रूप में अनुग्रह अनुदान के लिए अंचल कार्यालय सिंघवाड़ा में आवेदन दिया था। कई प्रक्रिया से गुजरने के बाद चार लाख रुपये मुआवजा भुगतान करने की स्वीकृति मिल गई। इसी बीच विपत की मां फुलो देवी ने आपत्ति दर्ज कराई।
युवक की मां ने कहा कि बेटे की मौत होने के कुछ महीने बाद ही बहू ने दूसरी शादी रचा ली। इसलिए अब वह मुआवजे की हकदार नहीं है। उन्होंने खुद को असल आश्रित बताते हुए मुआवजा भुगतान करने का अनुरोध किया है। सास-बहू के बीच इस विवाद से अधिकारी भी घोर संकट में आ गए।

मामले की गंभीरता देख गायघाट अंचलाधिकारी ने राजस्व कर्मचारी से जांच करवाई। रिपोर्ट में बताया गया कि विपत की मौत के बाद उसकी पत्नी ने मधुबनी में दूसरी शादी रचा ली है। स्थानीय सरपंच ने भी इसकी पुष्टि की। इसके बाद गायघाट सीओ ने सिंघवाड़ा अंचलाधिकारी से अंजली की दूसरी शादी करने के संबंध में अपने स्तर से जांच करवाते हुए रिपोर्ट देने का अनुरोध किया है।
अब मां मुआवजे की प्रबल दावेदार
विभागीय नियमानुसार, अगर किसी के पति की मौत होती है, तो प्रथम आश्रित उसकी पत्नी को माना जाता है। उसे ही मुआवजा देने का प्रविधान भी है। हालांकि, पत्नी दूसरी शादी कर लेती है, तो उसका इस परिवार से संबंध समाप्त हो जाता है। अब मृतक के आश्रित उसके माता-पिता होंगे। इस केस में भी पत्नी के दूसरी शादी करने की वजह से मां मुआवजे की प्रबल दावेदार है।
सिंघवाड़ा सीओ के रिपोर्ट पर आगे की कार्य
अब सब कुछ सिंघवाड़ा सीओ के रिपोर्ट पर निर्भर करता है। अगर दूसरी शादी करने के संबंध में उन्होंने भी पूर्व में दी गई रिपोर्ट का समर्थन किया तो निश्चित रूप से विपत की मां मुआवजे की हकदार होंगी। बता दें कि सिंघवाड़ा सीओ ने चार लाख रुपये अनुग्रह अनुदान के लिए अपर समाहर्ता, आपदा, दरभंगा को अनुशंसा की थी। उन्होंने इसपर मुहर लगाते हुए मुजफ्फरपुर डीएम को रिपोर्ट भेजी। इसके आलोक में एसडीओ पूर्वी ने भुगतान स्वीकृत कर दिया था।