पटना नहीं बिहार के इस शहर के ऐतिहासिक स्थलों की खूबसूरती देख रह जाएंगे दंग

बिहार : 1832 में मुंगेर भागलपुर से अलग हुआ था. उस वक्त मुंगेर का क्षेत्रफल काफी बड़ा था. मुंगेर के ही अंदर बेगूसराय, लखीसराय, खगड़िया, शेखपुरा और जमुई जिला आता था. जिसके बाद इन सभी को स्वतंत्र भारत में अलग जिला बनाया गया. मुंगेर जिला प्रशासन की ओर से शहर के अंदर आने वाले सभी सरकारी संपत्तियों का रंग-रोगन अच्छे तरीके से कराया गया है. इस तस्वीर में किला परिसर के अंदर स्थित बागवान पार्क के बाहरी चारदीवारी पर आकर्षक पेंट कराया गया है, जो लोगों को बरबस अपनी ओर खींच लेता है.

मुंगेर मुख्यालय के किला परिसर में बने सर्किट हाउस का बाहरी आवरण प्रकृति का खूबसूरत नजारा पेश करता है. इस रास्ते से गुजरने पर आपको हरे भरे पेड़ नजर आएंगे. बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचते हैं. मुंगेर में फोटोशूट के लिए बेहतरीन जगह में से एक माना जाता है.मुंगेर किला जिला मुख्यालय का सबसे प्रमुख जगहों में से एक है. इसके अंदर आपको कई अनमोल विरासत से रूबरू होने का मौका मिलेगा. जिसको जिला प्रशासन सुरक्षित करके रखा है. उसी में से एक है मुंगेर का दक्षिणी गेट. जो अपने आप में बेहद आकर्षक है. यहां बड़ी संख्या में पर्यटक घूमने के लिए आते हैं.

मुंगेर मुख्यालय का शहीद चौक की पहचान शहर के हृदय स्थल के तौर पर है. यह स्थल भी किला परिसर परिसर के अंदर हीं है. जिसके चारो तरफ सरकारी कार्यालय हैं. इस चौक पर शहीद पार्क भी है, जहां सैंकड़ों शहीदों के नाम अंकित है. सभी जंगे आजादी में अहम भूमिका निभाने वाले सभी मुंगेर के ही लाल हैं.

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