नेपाल ने भारत से की पांच कार्गो और दस पैसेंजर बोगियों की मांग, जनकपुर तक होगी माल की ढुलाई

मधुबनी : भारत-नेपाल मैत्री रेल परियोजन के तहत जयनगर से वर्दीवास तक ट्रेनों का परिचालन हो रहा है। दो फेज जयनगर से कुर्था और कुर्था से बिजलपुरा तक यात्री ट्रेनें दौड़ रही हैं।तीसरे फेज में भूमि अधिग्रहण का पेच फंसा हुआ है, लेकिन चालू हो चुके रेलखंड को सुचारू रूप से चलाने के लिए मालगाड़ी का चलना बेहद जरूरी है। इसके बिना नेपाल रेलवे को मुनाफा नहीं हो रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए नेपाल रेलवे ने भारत से फिलहाल पांच कार्गों बोगियों की मांग की है। नेपाल रेलवे ने इंडियन एंबेसी को पत्र लिखा है। पत्र लिख दस पैसेंजर बोगियों की भी मांग की गई है। नेपाल रेलवे के जीएम निरंजन झा के मुताबिक, भारत इसके लिये तैयार है। इस संबंध में भारत से सकारात्मक बात हुई है।

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दरअसल, जयनगर से वर्दीवास रेलखंड के दो फेज शुरू होने के बाद से नेपाल रेलवे को यह जरूरत महसूस हो रही है कि केवल पैसेंजर ट्रेनों के परिचालन से मुनाफा नहीं हो सकता है। रेल परियोजना वर्दीवास तक के लिए है, लेकिन उसमें भूमि अधिग्रहण का पेच फंसा हुआ है। वर्दीवास व्यापारिक केंद्र है। ऐसे में, नेपाल रेलवे ने योजना बनाई है कि तत्काल भारत से पांच कार्गो बोगियां लेकर माल ढुलाई का काम जनकपुर व कुर्था स्टेशन तक किया जाए। इसके लिए करीब तीन सप्ताह पहले नेपाल रेलवे ने भारतीय एंबेसी को पत्र लिखकर कार्गो और पैसेंजर बोगियों की मांग की है।

इसकी पुष्टि नेपाल रेलवे के जीएम निरंजन झा ने करते हुए बताया कि कोई भी रेलवे केवल यात्री ट्रेनों से मुनाफा नहीं कमा सकता है। जरूरी है कि माल ढुलाई का काम शुरू किया जाए। भारत बोगियां देने के लिए तैयार है। पैसेंजर बोगियों को बढ़ाने से ज्यादा से ज्यादा लोग इस रेलखंड पर यात्रा कर सकते हैं। फिलहाल, इस रेलखंड पर तीन फेरों में सवारी गाड़ियां चलती हैं।

जयनगर कस्टम कार्यालय की समस्या

नेपाल रेलवे के जीएम ने बताया कि समस्या जयनगर में कस्टम कार्यालय को लेकर भी है। वहां कस्टम कार्यालय पूरी तरह से क्रियाशील नहीं है।भारत से यह भी मांग की गई है कि इसे क्रियाशील बनाया जाए। इधर, नेपाल कुर्था में नया कस्टम कार्यालय तैयार करेगा। तत्काल नेपाल जनकपुर या इनरवा के मौजूदा कस्टम कार्यलय से काम कर सकता है।

क्या है परियोजना, कहां तक पहुंचा है काम?

करीब 850 करोड़ की इस रेल परियोजना में तीन फेज में काम होना था। इसमें दो फेज का काम पूरा हो चुका है। जयनगर से कुर्था (34 किमी) और कुर्था से बिजलपुरा (17.5 किमी ) तक रेल परिचालन हो रहा है। आखिरी फेज में 17.5 किमी बिजलपुरा से वर्दीवास तक रेलखंड तैयार किया जाना है। निर्माण कंपनी इरकॉन के जीएम विवेक निगम पहले ही कह चुके हैं कि लगभग 70 प्रतिशत भूमि एक साथ कम से कम चाहिए, तब इस पर काम शुरू हो सकता है।

नेपाल टुकड़ों में भूमि अधिग्रहण करके दे रहा है। वहीं, नेपाल रेलवे के मुताबिक, 75 प्रतिशत भूमि के लिए 19 प्रकार की दर से मुआवजा दिया जा चुका है। कुछ लोग इसमें बाधक बन रहे हैं। भूमि अधिग्रहण को लेकर भारत और नेपाल के अधिकारीयों के बीच दर्जनों राउंड की मीटिंग हो चुकी है, लेकिन ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है। गौरतलब है कि भारत-नेपाल के बीच इस रेल परियोजमा पर 2010 में सहमति बनी थी और 2014 से काम शुरू किया गया था।

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