पटना. शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव केके पाठक के निर्देश पर राज्यभर के कोचिंग की जारी हुई सूची में कोचिंग संस्थानों को लेकर चौंकाने वाला आंकड़ा सामने आया है. सभी जिलों के जिलाधिकारियों और जिला शिक्षा पदाधिकारियों ने विभाग को सूची भेजी है जिसमें जिलों में कोचिंग की संख्या और छात्रों की संख्या जारी की गई है. इसके अनुसार, राज्य के 12761 रजिस्टर्ड कोचिंग संस्थानों में कुल 9, 94, 645 छात्र हैं. बड़ी संख्या में ऐसे कोचिंग संस्थान हैं जो रजिस्टर्ड नहीं हैं और बिना अनुमति के ही संचालित किए जा रहे हैं. खास बात यह है कि ऐसे कोचिंग संस्थानों का राज्य सरकार के पास कोई ब्यौरा नहीं है.

शिक्षा विभाग द्वारा जारी इस सूची के अनुसार, राजधानी पटना में महज 1017 कोचिंग ही रजिस्टर्ड बताए जाते हैं, जबकि नामांकित छात्रों की संख्या महज 1, 51, 104 है. लेकिन, अनुमानित आंकड़ों के मुताबिक पटना में है 7 हजार कोचिंग संस्थान हैं और करीब 500 करोड़ रुपए का कारोबार सिर्फ पटना में है. खास बात यह है कि पटना में लगभग 85 प्रतिशत कोचिंग का सरकार के पास कोई ब्यौरा नहीं है. ऐसे में कहा जा सकता है कि बाकी सभी कोचिंग बिना रजिस्ट्रेशन के ही संचालित हो रहे हैं.

वहीं, शिक्षा विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पटना के बाद सबसे अधिक कोचिंग की संख्या बेगूसराय में है. यहां कुल कोचिंग 636 है. गया में 623, पूर्वी चंपारण में 604, पूर्णिया में 598, समस्तीपुर में 581, कटिहार में 577, दरभंगा में 565, पश्चिमी चंपारण में 536, सहरसा में 522 कोचिंग रजिस्टर्ड हैं. अब सरकार के पास सभी जिलों के कोचिंग और छात्रों का ब्यौरा पहुंच गया है. अब सवाल उठता है बिना अनुमति के इतनी व्यापक संख्या में कोचिंग संस्थान कैसे चल रहे हैं.
बता दें कि बिहार सरकार ने कोचिंग संस्थानों के लिए कुछ गाइडलाइन तय किए हैं. इसके तहत कोचिंग में कोई भी कक्ष का एरिया 300 वर्गफुट से कम नहीं होगा. जानकारी के अनुसार, कोचिंग संस्थानों को रजिस्ट्रेशन कराने के लिए 5000 का शुल्क देना होता है. ये रजिस्ट्रेशन 3 साल तक मान्य होते हैं. रजिस्ट्रेशन प्रमाण पत्र के लिए डीएम कमिटी गठित करते हैं. बता दें कि, बीते दिनों बिहार में कोचिंग संचालन को लेकर माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने मेल पर सुझाव मांगा था.