पितृ पक्ष समाप्त होने के बाद अब विवाह का लगन शुरू होने वाला है. ऐसे में कोसी, सीमांचल और मिथिलांचल में लोग अच्छे मुहूर्त के लिए पंडित के यहां जाते हैं. पूर्णिया के पंडित दयानाथ मिश्र कहते हैं कि मिथिलांचल में शादी करने के लिए लोगों को शुभ मुहूर्त की जरूरत होती है. ऐसे में कहा जाता है शादी हरि शायनी एकादशी यानी आसार शुक्ल पक्ष के एकादशी तक शादी मिथिला में कर सकते हैं. पुनः देउठान् एकादशी कार्तिक शुक्ल पक्ष एकादशी के बाद विवाह का मुहूर्त प्रारंभ होता है और देव उठान एकादशी तक विवाह होता है.

पंडित जी कहते हैं कि इसमें सबसे तगड़ा लग्न की अगर बात की जाए तो तगड़ा लग्न या शुभ मुहूर्त कन्या और वर के कुंडली मिलान और राशि के मिला कर पता किया जाता है. जिसके बाद लोगों को उनकी राशि और कुंडली के मुताबिक उनके लिए शुभ मुहूर्त मिलता है.

महीने की इन तारीखों को होगा शुभ मुहूर्त
पूर्णिया के पंडित दयानाथ मिश्र कहते हैं कि शादी की शुभ मुहूर्त नवंबर महीने में 24,27,29, दिसंबर महीने में 3,4,7,8,10,13,14,15, जनवरी महीने में 17,18,21,22,31, फरवरी महीने में 1,4,5,7,8,15,18,19,26,28, और मार्च महीने में 3,4,6,7,8,10,11, और अप्रैल महीने में 18,19,21,25,26,28, मई महीने मे 1, और जुलाई महीने में 5,10,11,12 को पड़ेंगे. वही, ये सभी उत्तम और शुभ मुहूर्त है. इसमें कोई भी जातक शादी कर सकता है.
लोग शुभ मुहूर्त की नहीं करते हैं फिक्र
पंडित जी आगे कहते हैं कि हालांकि, आजकल लोग शादी में शुभ मुहूर्त की बात तो करते हैं, लेकिन शुभ मुहूर्त से लोगों को कोई मतलब नहीं होता है. लोग गाने, बजाने और धूम धड़ाके में मशगुल होते हैं. जिस कारण उन्हें शादी की शुभ मुहूर्त से कोई लेना देना नहीं होता है. वह लोग गीत संगीत की दुनिया में शादी के शुभ मुहूर्त को ध्यान नहीं देते हैं. हालांकि, ऐसे लोगों को बाद में कई तरह की समस्याएं भी आती है. उन्होंने कहा की शादी के शुभ मुहूर्त आप कन्या और वर दोनों के कुंडली और राशि के मिलान से ही उन दोनों का शुभ मुहूर्त निकाला जाता है. और जातक को अपनी मुहूर्त में ही शादी करना विशेष लाभकारी होता है.