बिहार में दिखा अमेरिका का खूबसूरत विंटर पक्षी, इसके आने के बाद मौसम में दिखता है ऐसा बदलाव

भागलपुर : भागलपुर प्रदेश में पर्यावरण के मामले में महत्वपूर्ण योगदान दिया जा रहा है. यहां पर अनेक प्रजातियों की संरक्षण की दिशा में प्रयास किए जा रहे हैं, जिनमें पशु और पक्षियां शामिल हैं. भागलपुर में गरुड़ का प्रजनन केंद्र और डॉल्फिन सेंचुरी क्षेत्र भी है, जो प्राकृतिक विविधता की देखभाल में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. इसके साथ ही, अमेरिका के अलास्का प्रांत से आया ब्लू थ्रोट पक्षी भी भागलपुर में देखा जा रहा है, जिसकी सुंदरता और मेलोदियस आवाज सबको प्रभावित कर रही है. यह पक्षी छोटे आकार की होती है और इसका गला भूरा, काला, और लाल होता है, जो इसकी पहचान में मदद करता है.

ठंड के दिनों में देखने को मिलता हैं यह पक्षी
अमेरिका के अलास्का प्रांत से आने वाले ब्लू थ्रोट पक्षी के आगमन के संदर्भ में, प्राकृतिक जीवनशैली की एक रोचक झलक प्रकट हो रही है. इस पक्षी को ठंडी के दिनों में आमतौर पर देखा जाता है, और अलास्का के प्रांत में गर्मी के आगमन के साथ, यह उस स्थल से अलग होकर यहां आता है. यह पक्षी आमतौर पर झाड़ियों में देखा जाता है और अपने प्रजनन क्षेत्र के रूप में गंगा किनारे या समुद्र किनारे का चयन करता है. यह अकेला रहने वाला पक्षी है और यह ज्यादा शोर-शराबा पसंद नहीं करता, इसलिए यह खुद भी शांत और शोर कम जगहों पर ही दिखाई देता है. इसके प्रजनन क्षेत्र में यह तीन से चार अंडे देता है.

नसीब वाले ही देख पाते हैं

इस पक्षी को नसीब वाले ही देख पाते हैं. क्योंकि हर एक जगह पर यह पक्षी नजर नहीं आता है. इस पक्षी को विंटर पक्षी भी कहते हैं. इसलिए, जब यह पक्षी भागलपुर में दिखने लगे तो समझ जाइए की सर्दी अब आने वाली है.

क्या हैं इसके फायदे
सर्दी के सीजन में खेतों में बुवाई की शुरुआत होती है, और यह खेती की दृष्टि से महत्वपूर्ण समय होता है. पौधों में आने वाले छोटे-छोटे कीटों की एक चिंता होती है, लेकिन यह पक्षी उन कीटों को खाते हैं और पौधों को नुकसान से बचाते हैं. हालांकि कई बार, खेतों में कीटनाशक का छिड़काव होने की वजह से, जब यह पक्षी उन कीड़े मकोड़े को खाती है, तो उसके साथ भी इसकी मृत्यु हो जाती है, इसलिए पर्यावरण स्पेशलिस्ट ने अपील की है कि जिन क्षेत्रों में यह पक्षी पाया जाता है, वहां पर कीटनाशक का प्रयोग न करें, ताकि उनके खेतों के लिए यह सुरक्षित रूप से बरकरार रह सके. यह पक्षी फसल की कीटों को नष्ट करने में सहायक होता है, और इसका बिना नुकसान पहुंचाए, प्राकृतिक तरीके से कीटनाशक के उपयोग को कम कर सकता है.

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