पटनाः 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान बिहार के जिन खास सीटों पर सियासी पंडितों की नजर है उनमें एक बक्सर लोकसभा सीट भी है. दरअसल इस सीट पर बीजेपी ने अश्विनी चौबे को बेटिकट कर मिथिलेश तिवारी को अपना कैंडिडेट बनाया है वहीं आरजेडी ने सुधाकर सिंह को मैदान में उतारा है लेकिन यहां से जिस शख्स की सबसे ज्यादा चर्चा हो रही है वो हैं पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा जो वीआरएस लेकर चुनावी सियासत में कूद पड़े हैं और बक्सर की जंग को रोचक बना रहे हैं.
सोशल मीडिया पर मिल रहा जबरदस्त समर्थन
2011 बैच के आईपीएस आनंद मिश्रा ने अपनी नौकरी के दौरान असम के तेजतर्रार पुलिस अधिकारियों में अपनी जगह बनाई थी. आईपीएस अधिकारी के रूप में उनकी कार्यशैली ने काफी सुर्खियां बटोरी थीं. नतीजा बक्सर की चुनावी जंग में कूदने के बाद आनंद मिश्रा को सोशल मीडिया पर जबरदस्त समर्थन मिल रहा है. आनंद मिश्रा का एक ऐसा ही वीडियो सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहा है और लोग कह रहे हैं कि बिहार को ऐसे नेताओं की जरूरत है. बक्सर को बदलाव की जरूरत है.
छपरा जिला के अकाउंट से डाला गया वीडियो
छपरा जिला के नाम से X सोशल अकाउंट पर आनंद मिश्रा के इस वीडियो को लोग पसंद तो कर ही रहे हैं और उस पर अपनी प्रतिक्रिया भी दे रहे हैं.
दिलचस्प होगा बक्सर का ‘बैटल’
वैसे तो बक्सर लोकसभा सीट के लिए वोटिंग आखिरी चरण में 1 जून को होगी लेकिन ये लोकसभा सीट अभी से हॉट बन चुकी है. इस लोकसभा सीट से बीजेपी ने मौजूदा सांसद और केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे की जगह मिथिलेश तिवारी को अपना उम्मीदवार बनाया है वहीं आरजेडी ने पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष जगदानंद सिंह की जगह इस बार उनके बेटे सुधाकर सिंह को बक्सर के ‘बैटल’ में उतार दिया है.
आनंद मिश्रा और ददन पहलवान बिगाड़ेंगे खेल !
बीजेपी और आरजेडी कैंडिडेट के अलावा जिन दो लोगों पर सबकी नजर है वो हैं पूर्व आईपीएस आनंद मिश्रा और इलाके की सियासत में अपनी धाक रखनेवाले ददन यादव उर्फ ददन पहलवान. आनंद मिश्रा के ताल ठोकने के कारण जहां बीजेपी में बेचैनी है वहीं ददन पहलवान के चुनाव मैदान में उतरने के एलान ने आरजेडी कैंडिडेट के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं.
ब्राह्मण बहुल सीट है बक्सर
देश के उन गिने-चुने लोकसभा सीटों में एक बक्सर लोकसभा सीट भी है जिस पर ब्राह्मण वोटर्स सबसे ज्यादा हैं. आंकड़ों के मुताबिक इस सीट पर ब्राह्मण मतदाताओं की संख्या 4 लाख से भी ज्यादा है. इसके बाद यादव 3.5 लाख और राजपूत वोटर्स भी 3 लाख हैं. साथ ही करीब ढाई लाख के आसपास भूमिहार और डेढ़ लाख के आसपास मुस्लिम वोटर्स भी हैं.




