गया : ठंड की शीतलहर हाड़ कंपा देने जैसी है. लोग ठंड से बचने के लिए तरह-तरह के गर्म कपड़े व अन्य चीजों का उपयोग कर रहे हैं. इसी बीच बिहार के गया के कई मंदिरों में भगवान को ठंड न लगे, इसके लिए भक्तों ने कई तरह के इंतजाम किए हैं. मंदिरों में अब भगवान उनी वस्त्र पहने नजर आ रहे हैं, तो उनके भोग में भी मौसम के अनुसार बदलाव कर दिया गया है.

गया के इस्कॉन मंदिर में भगवान को पहनाए गए ऊलेन वस्त्र
भगवान को ठंड न लगे, इसके लिए मंदिर में तमाम व्यवस्थाएं की गई है. भगवान की प्रतिमाओं को गर्म वस्त्र पहनाए गए हैं. सिर पर ऊनी टोपी भी है. इस्कॉन मंदिर में जितने भी देवी देवताओं की प्रतिमाएं हैं, सभी को ऊलेन वस्त्र पहनाए गए हैं. वहीं माता तुलसी को भी शॉल पहनाया गया है.
दिसंबर के महीने में चल रही है शीतलहर
दिसंबर का महीना है और ठंढ चरम पर पहुंचने लगी है. शीतलहरी काफी चल रही है. ऐसे में गया के कई मंदिरों में भगवान के प्रति भक्तों की अटूट आस्था देखने को मिल रही है. भगवान को स्नान गर्म पानी से ही हो रहा है. भगवान को तरह-तरह के ऊलेन कपड़े पहनाए जा रहे हैं. तरह-तरह के आकर्षकों स्वेटर में भगवान का रूप और भी मनमोहक लग रहा है.

मौसम के अनुसार भोग में भी बदलाव
वहीं, मौसम के अनुसार भगवान को लगने वाले भोग में ही बदलाव किया गया है. भगवान को गाढ़ा दूध और उसमें केसर, अदरक आदि मिलाकर भोग लगाया जा रहा है. वहीं तिल भी भगवान को भोग में अर्पित किया जा रहा है. अभी ठंड के दिन में भगवान को जितने भी भोग लगा रहे हैं, कोशिश यही हो रही है कि ठंड से बचने वाले पदार्थ का ही भोग भगवान को लगाया जाए.



‘भगवान भी एक व्यक्ति के रूप में’
इस संबंध में इस्कॉन मंदिर गया के अध्यक्ष जगदीश श्याम दास बताते हैं कि भगवान भावग्राही है. भगवान प्रेम के भूखे होते हैं. भगवान जी तो सर्दी-गर्मी के ऊपर हैं, क्योंकि उनका शरीर सच्चिदानंद है. बता दें कि गया का इस्कॉन मंदिर प्रसिद्ध मंदिरों में से एक है. यहां राधे-कृष्ण, भगवान जगन्नाथ, बलराम जी, सुभद्रा माता, चैतन्य महाप्रभु देवी देवताओं की प्रतिमा है. माता तुलसी भी विराजमान हैं.

