बिहार में 33 शिक्षकों की नौकरी चली गई, पटना हाई कोर्ट के आदेश पर होगी सेवा समाप्त

गोपालगंज: बिहार के गोपालगंज जिले के विभिन्न प्रखंडों में सेवा दे रहे 33 शिक्षकों को सेवामुक्त करने का राज्य अपीलीय प्राधिकार द्वारा आदेश दिया गया है.

साथ ही वेतन वसूली का भी निर्देश जारी गया है. विभाग द्वारा किए गए इस कार्रवाई के बाद शिक्षकों में हड़कंप मची हुई है. दूसरी तरफ विभाग द्वारा हर हाल में 25 मार्च तक इन 33 शिक्षकों को सेवा मुक्त करने का भी निर्देश दिया गया है.

33 शिक्षकों की गई नौकरी: दरअसल जिला अपीलीय प्राधिकार से बिना रिक्ति के 33 शिक्षकों की नियुक्ति हुई थी. जब यह मामला राज्य अपीलीय प्राधिकार में पहुंचा, तो वहां से इन शिक्षकों को सेवामुक्त कर वेतन वसूली का आदेश दिया गया था. इसके बाद इन शिक्षकों ने अपील की थी, जिसे खारिज कर दिया गया है. इन शिक्षकों से बचाव में मांगे गए दावे को स्वीकार नहीं किया गया.

शिक्षकों पर लटकी वेतन वसूली की तलवार: इस संदर्भ में जिला शिक्षा पदाधिकारी योगेश कुमार ने संबंधित बीईओ को निर्देश दिया है, कि इन 33 शिक्षकों को सेवामुक्त कर नियुक्ति तिथि से वेतन में दी गई राशि की गणना करते हुए वसूली की जाए. सभी नियोजन इकाइयों को निर्देश दिया गया है कि 25 मार्च तक सभी शिक्षकों को सेवामुक्त कर दिया जाए. सेवामुक्त नहीं किए जाने पर हाइकोर्ट के आदेश और उच्चधिकारियों के आदेश की अवहेलना मानते हुए कठोर कार्रवाई की जाएगी.

इस प्रखंड से हैं सबसे ज्यादा शिक्षक: हेडमास्टर को निर्देश दिया गया है कि 25 मार्च तक सेवामुक्त नहीं किए जाने की स्थिति में उनकी उपस्थिति पर रोक लगाएं. साथ ही उनके ई-शिक्षा कोष आईडी को डिएक्टिवेट करें. इन शिक्षकों में सबसे अधिक बैकुंठपुर प्रखंड के रहने वाले हैं. बैकुंठपुर प्रखंड के अलग-अलग विद्यालयों के 14 शिक्षकों को सेवा मुक्त किया गया है.

इन प्रखंडों के हैं सभी शिक्षक: इसके अलावा बरौली प्रखंड के पांच शिक्षक सेवामुक्त हुए हैं. गोपालगंज सदर प्रखंड के तीन, कुचायकोट प्रखंड के दो, फुलवरिया प्रखंड के दो, थावे उचकागांव, भोरे, विजयीपुर, पंचदेवरी तथा मांझा प्रखंड के एक-एक शिक्षकों को सेवा मुक्त किया गया है. फिलहाल जिले भर के शिक्षक महकमे में राज्य अपीलीय प्राधिकार का यह आदेश चर्चा का विषय बना हुआ है.

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