नई दिल्ली/बहावलपुर। भारत ने आतंकवाद के खिलाफ अपने सबसे निर्णायक और साहसी सैन्य ऑपरेशन को अंजाम देते हुए जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष आतंकी अब्दुल रऊफ अज़हर को उसके गढ़ बहावलपुर, पाकिस्तान में खत्म कर दिया। भारतीय वायुसेना द्वारा चलाए गए ऑपरेशन सिंदूर ने न सिर्फ जैश-ए-मोहम्मद की कमर तोड़ दी, बल्कि आतंक के उस चेहरे को भी हमेशा के लिए मिटा दिया जो वर्षों से भारत के खिलाफ खूनखराबे का मास्टरमाइंड रहा।

7 मई की सुबह, जब आतंक की कब्र खुदी
भारतीय वायुसेना ने सुबह के 2:30 बजे बहावलपुर स्थित जैश मुख्यालय पर SCALP क्रूज़ मिसाइलों से सटीक हमला किया। इस हमले में अब्दुल रऊफ अज़हर, जो जैश के संस्थापक मसूद अज़हर का भाई था, अपने कई साथियों समेत मारा गया। यह वही शख्स था जो 1999 में काठमांडू से दिल्ली जा रहे IC-814 विमान के अपहरण का मुख्य साजिशकर्ता था और कई वर्षों से भारत की वांटेड लिस्ट में सबसे ऊपर था।
राउफ़ अज़हर – एक खूनी इतिहास
अब्दुल रऊफ अज़हर न केवल जैश-ए-मोहम्मद का सैन्य ऑपरेशनल प्रमुख था, बल्कि उसे 2001 के संसद हमले, 2016 के पठानकोट एयरबेस हमले और 2019 के पुलवामा आतंकी हमले का मास्टरमाइंड भी माना जाता है।
वह लंबे समय से पाकिस्तान की सरकारी शह पर बहावलपुर में सुरक्षित बैठा भारत के खिलाफ आतंकी हमलों की योजना बना रहा था। पर अब भारत ने अपने एक और दुश्मन को उसकी मांद में घुसकर खत्म कर दिया है।

ऑपरेशन सिंदूर: एक सटीक और साहसिक मिशन
22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 हिंदू पर्यटकों की हत्या के बाद भारत सरकार ने आतंक के खिलाफ निर्णायक कार्यवाही का निर्णय लिया। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार, वायुसेना प्रमुख और रक्षा मंत्रालय के समन्वय से यह रणनीतिक ऑपरेशन तैयार किया गया, जिसमें एक दर्जन से अधिक लक्ष्यों पर हमला किया गया।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया: भारत के समर्थन में विश्व
अब्दुल रऊफ अज़हर के मारे जाने की पुष्टि होते ही अमेरिका, फ्रांस, इज़राइल और कई अन्य देशों ने भारत की इस कार्रवाई की सराहना की। अमेरिका के विदेश विभाग ने बयान जारी कर कहा, “यह वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ भारत का साहसिक कदम है, और हम इसके साथ खड़े हैं।”

पाकिस्तान की घबराहट और बयानबाज़ी
पाकिस्तान ने भारतीय हमलों को “अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन” बताते हुए संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कराई, लेकिन विश्व समुदाय ने भारत के आत्मरक्षा के अधिकार को सही ठहराया। पाकिस्तान का झूठा नैरेटिव, एक बार फिर, वैश्विक मंच पर विफल रहा।
आतंक के दुर्ग का पतन
ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि भारत की स्पष्ट चेतावनी है – अब आतंकवादी सुरक्षित नहीं हैं, चाहे वे कहीं भी छिपे हों। अब्दुल रऊफ अज़हर की मौत केवल एक सिर का गिरना नहीं, बल्कि उस विचारधारा की हार है, जो वर्षों से भारत को लहूलुहान कर रही थी।
भारत ने यह स्पष्ट कर दिया है – खून का बदला खून नहीं, ठंडी और सटीक रणनीति से लिया जाएगा।





