अम्बाला. यहां के पंजोखरा साहिब में गुरुवार को तीन साल का एक बच्चा 30 फीट गहरे बोरबेल में गिर गया। आसपास के लोगों को जैसे ही इसका पता चला, वहां अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने पुलिस को जानकारी दी। इस बीच, एक किसान रणधीर सिंह ने बच्चे को निकालने की जिम्मेदारी ली। सरिए और रस्सी की मदद से सिर्फ 45 मिनट में बच्चे को बाहर निकाल लिया। बच्चे का नाम कर्ण है।
पंजोखरा साहिब के खेतों में एक महिला अपने बच्चे को लेकर खेत में घास काटने गई थी। वह बच्चे को नीचे बैठाकर घास काटने लगी। इस बीच, सुबह 10:15 बजे कर्ण खेलते हुए 12 इंच चौड़े बोरवेल के पास पहुंच गया। वहां ढलान होने के कारण वह फिसलकर 30 फीट गहरे बोरवेल में गिर गया।
सरिए को बच्चे के कपड़ों में फंसाया: रणधीर ने गांव के लोगों से सरिए और रस्सी लाने को कहा। फिर उसने दो सरिए को यू आकार में मोड़ा। इसके बाद धीरे-धीरे रस्सी बोरवेल में उतारी और इसे गोल-गोल घुमाता रहा, ताकि सरिया बच्चे की कपड़ों में फंस जाए। रणधीर ने बताया कि जैसे ही मुझे महसूस हुआ कि सरिए का एंगल बच्चे की टीशर्ट में छाती और पीठ की तरफ फंस चुका है तो मैंने रस्सी को घुमाया, ताकि सरिया अच्छी पकड़ बना लें। इसके बाद रस्सी को धीरे-धीरे खींचना शुरू किया। बच्चे को ऊपर लाने में 45 मिनट लगे।
गर्दन तक पानी में फंसा था बच्चा: रणधीर सिंह ने बताया कि पहले बच्चे का सिर वाला हिस्सा बाहर आया, क्योंकि वह बोरवेल में सीधा गिरा था। वह गर्दन तक गीला था। उलटा गिरा होता तो मुंह पानी में जाने के कारण जान जा सकती थी। बोरबेल से निकालने के बाद बच्चे को प्राथमिक सामुदायिक केंद्र ले जाया गया, जहां उसने उल्टियां कीं। इसके बाद उसे अम्बाला कैंट रेफर कर दिया गया। डॉक्टरों ने बताया कि अगर बच्चा एक घंटा और बोरवेल में रह जाता तो जान जा सकती थी, क्योंकि गर्दन से नीचे का हिस्सा पानी में रहने से ठंडा पड़ चुका था।
प्रिंस का देश का सबसे चर्चित मामला: 12 साल पहले कुरुक्षेत्र के हल्दाहेड़ी में 60 फीट गहरे बोरवेल में 5 साल का प्रिंस गिर गया था। सेना ने करीब 50 घंटे रेस्क्यू ऑप्रेशन चलाकर उसे बाहर निकाला था। यह मामला बहुत चर्चित हुआ था। गुरुवार को हुई यह घटना हल्दाहेड़ी से करीब 25 किमी दूर हुई।