वाटर प्यूरीफायर का आंखें खोल देने वाला सच : ऐसी कंडीशन में पानी को फिल्टर करने की जगह जानलेवा बना देता है प्यूरीफायर, एक्सपर्ट ने बताया घर में लगी मशीन चेक करने का आसान तरीका…

न्यूज डेस्क। वॉट्सऐप पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। जिसमें वाटर प्यूरिफायर में यूज की जाने वाली डुप्लिकेट मेम्ब्रेन (झिल्ली) के बारे में बताया जा रहा है। दरअसल, मेम्ब्रेन को जब तोड़ा गया तब उसमें से ब्लैक कलर का कटा हुआ कपड़ा और रेशे जैसा कुछ निकलता है। यदि इससे फिल्टर किया गया पानी पिया जाता तब इंसान को गंभीर बीमारी भी हो सकती थीं।

मार्केट में अब ऐसी कई छोटी-छोटी कंपनियां आ चुकी हैं, जो ब्रांडेड कंपनी से कम कीमत में वाटर प्यूरिफायर दे रही हैं। लोग भी सस्ते के चलते इस तरह के प्यूरिफायर को खरीद लेते हैं। वैसे, कुछ कंपनियों के डुप्लिकेट प्यूरिफायर भी पकड़ने के कई मामले सामने आ चुके हैं। प्यूरिफायर में यूज होने वाली मेम्ब्रेन का काम क्या है और पानी को फिल्टर करने के लिए ये कितनी जरूरी है।

बीते 12 सालों से वाटर प्यूरिफायर का काम करने वाले मैक्सकूल कंपनी के ऑनर मांगीलाल वर्मा ने बताया कि मेम्ब्रेन के अंदर 0.5 माइक्रोन होल वाली जाली होती है। इसके होल इतने महीन होते हैं कि दिखाई नहीं देते। जब पानी पहले फिल्टर से होकर मेम्ब्रेन में पहुंचता है तब ये जालियां उसे फिल्टर करके आगे बढ़ा देती हैं। वहीं, पानी के वेस्ट पार्ट या खराब पानी को दूसरी तरफ से बाहर कर देती हैं।

ऐसे चेक करें पानी फिल्टर है या नहीं

मांगीलाल ने बताया कि आपके घर में यूज होने वाला प्यूरिफायर या उसमें लगा मेम्ब्रेन असली है, इस बात का पता पानी के TDS (टोटल डिजॉल्व्ड सॉलिड) लेवल से पता लगा सकते हैं। दरअसल, पानी फिल्टर होने के बाद उसका TDS 100 से 50 के बीच में रखा जाता है। कई लोग इसे 10 से 15 तक भी करा लेते हैं। ऐसे में यदि पानी का TDS कम नहीं हो रहा है तब वो फिल्टर नहीं है। यानी या तो प्यूरीफायर का कोई पार्ट काम नहीं कर रहा या फिर वो डुप्लिकेट है। TDS चेक करने वाला मीटर 200 रुपए से भी कम में आ जाता है।

बीमार होने का भी खतरा

अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल कॉलेज, विदिशा के सर्जरी विभाग के डॉक्टर नीरज जैन (MS जनरल और लैप्रोस्कोपिक सर्जन) ने बताया कि यदि प्यूरीफायर का पानी फिल्टर नहीं है, तब उससे कई सारी बीमारियां भी हो सकती हैं।

> पानी में कैल्शियम ज्यादा जा रहा है, तब लिवर या किडनी में स्टोन बन सकता है।

> हार्ड पानी पीने से डाइजेशन खराब होना, पेट में दर्द, कब्ज होने की प्रॉब्लम भी शुरू हो जाएगी।

> प्यूरीफायर में UV (अल्ट्रावाइलेट प्यूरिफिकेशन) का इस्तेमाल बैक्टीरिया मारने के लिए किया जाता है, ऐसे में बैक्टीरिया ही नहीं मर रहे तब ज्वाइंडिस जैसी जानलेवा बीमारी भी हो सकती है।

> बाल झड़ने की प्रॉब्लम भी शुरू हो जाएगी।

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