
PATNA : नीतीश कुमार के लिए 2014 का लोकसभा चुनाव किसी भयानक सपने से कम न था। उनकी झोली लगभग खाली रह गयी थी। अब वे भाजपा की मदद से झोली भरने की तैयारी में हैं। 2019 में जदयू 16 या 17 सीटों पर चुनाव लड़ेगा। वे पिछली हार को भुला कर सीट टू सीट जीत की रणनीति बना रहे । नीतीश के दिल्ली स्थित नये आशियाने में शह-मात की बाजी तैयार हो रही है।
2014 का लोकसभा चुनाव नीतीश कुमार के राजनीतिक जीवन का सबसे शर्मनाक पल था। इतनी करारी हार तो उन्हें तब नहीं मिली थी जब उन्होंने अपनी नयी नवेली समता पार्टी के बैनर तले 1995 में विधानसभा का चुनाव लड़ा था। 2014 में नीतीश के सीएम रहते जदयू की भद्द पिट गयी थी। नीतीश की पार्टी के 27 उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गयी थी। केवल 2 सीटों पर ही जीत मिली थी। सभी 40 सीटों पर चुनाव लड़ने वाले जदयू की मिट्टीपलीद हो गयी थी। नीतीश ने पहली बार अकेले चुनाव लड़ा था। सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री माने जाने वाले नीतीश के लिए यह हार बेहद शर्मनाक थी।
इस हार ने नीतीश कुमार के आत्मविश्वास को तोड़ दिया था। उन्हें भरोसा था कि जनता उनके काम का इनाम देगी लेकिन ऐसी हुआ नहीं। नीतीश कुमार ने इस हार की नैतिक जिम्मेवारी लेते हुए सीएम के पद से इस्तीफा दे दिया था। जदयू विधायक दल ने फिर से नीतीश को नेता चुना था और इस्तीफा वापस लेने के लिए दबाव बनाया था। लेकिन नीतीश नहीं माने । नीतीश कुमार की पसंद, जीतन राम मांझी को नया मुख्यमंत्री बनाया गया। लेकिन मांझी की मनमर्जी से नीतीश नाराज हो गये थे। आखिरकार नीतीश को एक बार फिर सत्ता की बागडोर संभालनी पड़ी। अब नीतीश बुरे सपने को भुला कर 2019 में पुरानी धाक जमाने के लिए बेचैन हैं।