ताउम्र जेल से बाहर नहीं आयेंगे शहाबुद्दीन, सुप्रीम कोर्ट ने लगाई मुहर

NEW DELHI : सीवान वाले शहाबुद्दीन को अब ताउम्र जेल में ही कैद रहना होगा. उम्र कैद की सजा पर सीधे सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने मुहर लगा दी है. साथ में, जस्टिस एस के कौल और जस्टिस के एम जोसेफ बेंच में थे. चीफ जस्टिस गोगोई सुनवाई के वक्‍त इतने तल्‍ख थे कि उम्र कैद की सजा बहाल रखने के लिए सरकार के स्‍टैंडिंग काउंसेल केशव मोहन को भी बहुत पैरवी नहीं करनी पड़ी.

जान लें, राजद के पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को नई दिल्‍ली के तिहाड़ जेल में कैद रखा गया है .सुप्रीम कोर्ट ने उम्र कैद की सजा बहाल रखने का फैसला सोमवार 29 अक्‍तूबर को सीवान के चंदा बाबू के तीन बेटों की क्रूर हत्‍या के मामले में सुनाया है . शहाबुद्दीन को पहले स्‍पेशल कोर्ट ने सजा सुनाई थी . आगे पटना हाई कोर्ट ने बहाल रखा था.

अंत में, शहाबुद्दीन फैसले को चुनौती देने को सुप्रीम कोर्ट पहुंचे थे. पर, यहां भी वे हार गए. मतलब उम्र भर की कैद काटने को शहाबुद्दीन अब जेल में ही रहेंगे. चीफ जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एस के कौल और के एम जोसेफ की बेंच में शहाबुद्दीन की ओर से पैरवी करने को सीनियर एडवोकेट्स की बड़ी टीम लगी थी. ये सभी मामले में एडवांस्‍ड आरगूमेंट्स करना चाह रहे थे, पर बेंच ने ऐसे सवाल दागे कि तर्क काम नहीं आए.

सीवान में अगस्‍त, 2004 में दो भाइयों सतीश और गिरीश रौशन की हत्‍या तेजाब से नहला कर क्रूर तरीके से कर दी गई थी . आरोप शहाबुद्दीन और उनके शागिर्दों पर लगा था. तब शहाबुद्दीन राजद के सांसद भी थे. बाद में इन दोनों भाइयों के तीसरे राजेश रौशन को 6 जून, 2014 को मार दिया गया था. राजीव रौशन अपने दोनों भाइयों की हत्‍या के मामले में गवाह था.

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को शहाबुद्दीन की याचिका ठुकराने के पहले पूछा कि राजीव रौशन की हत्‍या का मेंटर कौन था. राजीव रौशन की हत्‍या के वक्‍त शहाबुद्दीन जेल में ही कैद थे. शहाबुद्दीन को नवंबर, 2005 में चुनाव आयोग द्वारा दिल्‍ली से बुलाकर बिहार लाए गए चर्चित आईपीएस आफिसर आर एस भट्टी की स्‍पेशल टीम ने नई दिल्‍ली से गिरफ्तार किया था. तब से वे कुछ दिनों को छो़ड़ जेल में ही हैं.

Leave a Reply

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Discover more from Muzaffarpur News

Subscribe now to keep reading and get access to the full archive.

Continue reading