#BIHAR #INDIA : राज्य सरकार जल्द बिहार में उम्टा (यूनीफाइड मेट्रोपालिटन ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी) का गठन करने की तैयारी कर रही है। यह एक नियामक प्राधिकार होगा जो शहर के यातायात नियंत्रण की विस्तृत कार्ययोजना बनाने के साथ ही उसके क्रियान्वयन के लिए काम करेगा। वर्ष 2017 में बनी नई मेट्रो पॉलिसी में इसे मेट्रो संचालित करने वाले सभी राज्यों के लिए अनिवार्य कर दिया गया है। बिहार ने इस दिशा में प्रभावी पहल करते हुए तीन केंद्रीय एजेंसियों से उम्टा बिल के निर्माण और उसके संचालन में सहयोग की कार्ययोजना बनाने का प्रस्ताव आमंत्रित किया है।

शहरी यातायात को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों के लिए एक नया प्रयोग किया है। इसका प्रावधान मेट्रो पॉलिसी में करके पहले मेट्रोपालिटन शहरों में इसे शुरू कराया जा रहा है। अभी देश में किसी भी प्रदेश ने उम्टा का गठन नहीं किया है। मगर बिहार ने इसकी कवायद तेज कर दी है। नई मेट्रो पॉलिसी के हिसाब से यह नियामक प्राधिकार शहर का समेकित यातायात कार्ययोजना तैयार करेगा। प्राधिकार मेट्रो स्टेशन को बस सहित पब्लिक ट्रांसपोर्ट के दूसरे साधनों से जोड़ने के अलावा किराया निर्धारण पर भी राज्य सरकार को सुझाव देगा। यातायात के संचालन से जुड़ी राज्य की विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय स्थापित करने के अलावा शहरी यातायात कोष का प्रबंधन भी करेगा।

इसके लिए उम्टा विधेयक तैयार किया जाना है। जिसे राज्य कैबिनेट से पारित कराया जाएगा। इस बिल को तैयार करने के साथ ही उसका क्रियान्वयन शुरू करने के लिए सरकार ने प्रस्ताव आमंत्रित किए हैं। नगर विकास एवं आवास विभाग ने आईयूटी (इंस्टीट्यूट ऑफ अरबन ट्रांसपोर्ट), एसपीए (स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्कीटेक्चर) और यूएमटीसी (अरबन मॉस ट्रांजिट कंपनी लिमिटेड) को पत्र भेजकर प्रस्ताव देने को कहा है। तीनों केंद्रीय एजेंसियों से एक सप्ताह में प्रस्ताव मांगा गया है। इस प्रस्ताव में जरूरी स्टाफ, बैठकें, समन्वय स्थापित करने के अलावा कोष प्रबंधन सहित अन्य सभी चीजें शामिल होंगी। सबसे बेहतर प्रस्ताव का आंकलन करने के बाद विभाग उम्टा बिल तैयार करने का काम उसे सौंप देगा। दरअसल विभाग सिर्फ इसका गठन ही नहीं उसे प्रभावी भी करना चाहता है। ताकि शहरी यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाया जा सके।
