इस कथित सुसाइड नोट में जैन मुनि ने अपनी परेशानी बताई है। वे खुद से किसी बात से परेशान थे। हालांकि किस बात से परेशान थे, इसका खुलासा नहीं है। नोट में यह भी लिखा गया है कि एक साधु होकर ऐसा करना गलत है।
रोजाना शाम 4.30 बजे से रात 8 बजे तक दर्शनार्थियों से मिलते थे
जैन मंदिर के प्रबंधक जागेश कुमार जैन ने बताया कि जैन मुनि विप्रण सागर महाराज सुबह 10.30 बजे आहार लेते थे। फिर आहार देने वालों के साथ लगभग 12.30 बजे तक बैठते थे। फिर अपने कमरा नंबर-3 में चले जाते थे।
शाम में साढ़े चार से पांच बजे से रात आठ बजे तक दर्शनार्थियों से मिलते थे। मंगलवार शाम को जब जैन मुनि कमरे से नहीं निकले तो दर्शनार्थी उनके कमरे तक पहुंचे। दरवाजा भीतर से बंद था।
शाम छह बजे तक दरवाजा नहीं खुला तो जैन मुनि के कर्मी धन सिंह और अरविंद जैन ने प्रबंधक को जानकारी दी। प्रबंधक भी कमरे के पास पहुंचे। तब तक अन्य अनुयायी अजय जैन, राजेश कुमार जैन समेत अन्य लोग भी आ गए। मंदिर में तैनात गार्ड को बुलाया गया। कमरा नंबर-चार के भीतर से दीवार फांद कर मुनि के कमरे में भेजा गया। संयोग से मुनि के कमरे का पीछे का दरवाजा खुला था।
धर्म परिषद के अध्यक्ष सुमित जैन ने बताया, विप्रण सागर महाराज मध्यप्रदेश के दमोह के रहने वाले थे। 18 साल पहले उन्होंने मेरू भूषण महाराज से दीक्षा ली थी और गृहस्थ जीवन त्याग दिया। राजस्थान, झारखंड और बिहार समेत देश के कई राज्यों में वे भ्रमण पर रहे। लोगों को सुखी जीवन और धर्म से जुड़ने का मंत्र दिया।
समाज के लिए उनका सबसे खास मंत्र था, धर्म से ऊपर देश है। देश सेवा, रक्षा और सुरक्षा से बड़ा कुछ नहीं। धर्म समाजसेवा का मार्ग है। जिस समाज में लोग खुश रहते हैं, वही सबसे बड़ा धर्म है। मानवता को जगाने और धर्म की राह पर समाज को ले जाना ही उनके जीवन का मकसद रहा।
भागलपुर समाज को मंगल आशीर्वाद
सभी साधर्मी भाई-बहनों को भागलपुर समाज को मंगल आशीर्वाद। हमारे संघ को किसी भी प्रकार कि परेशानी नहीं होनी चाहिए। हमारे स्टाफ से पूछताछ नहीं करना है। कोई इन्क्वायरी भी नहीं की जाए।
हमारे समाज को किसी भी प्रकार की परेशानी न होनी चाहिए। मगर हम अपने आप से बहुत परेशान थे। हमें साधु होकर ये काम नहीं करना चाहिए। मगर हम गलत कर रहे हैं। अब समाज को स्वयं सब पता है। इसलिए धर्म और समाज की किसी भी प्रकार की कार्रवाई न तो पुलिस करेगी और नहीं समाज। पूरे भारत वर्ष में मेरे भक्त हैं। उनको मंगल आशीर्वाद। सबको क्षमा, सबसे क्षमा। मेरी स्वेच्छा मृत्यु ही है। संघ का ध्यान पूरे समय हमारे संघ पति और समाज जरूर रखें।