#BIHAR #INDIA : वाल्मीकि टाइगर रिजर्व (वीटीआर) में इस साल बाघों की गणना शुरू हो गई है। वीटीआर के घने जंगलों में इसके लिए पांच सौ कैमरे लगाए गए हैं। इन कैमरों से बाघों की ट्रैपिंग हो रही है। फरवरी से मार्च तक ट्रैपिंग का काम पूरा हो जाएगा। अभी प्रथम चरण में जंगलों के आधे हिस्से में कैमरे लगे हैं। यह जनवरी तक लगा रहेगा। उसके बाद दूसरे चरण में बचे हिस्सों में इन कैमरों को खोलकर लगाए जाएंगे। अगले दो महीने के बाद जंगलों में ली गई बाघों की तस्वीर को भारतीय वन्य प्राणी संस्थान को भेजा जाएगा तब यह संस्थान राष्ट्रीय व्याघ्र संरक्षण प्राधिकरण देहरादून को यह भेजेगा, जिसके बाद बाघों की संख्या की रिपोर्ट जारी होगी।

इस तरह की जाती है बाघों की गणना
बाघों की गिनती के लिए वन्यक्षेत्र में इंप्रेशन पैड और कैमरा टिप पद्धति को अपनाया जाता है। इसके तहत 45 दिनों तक टिप कैमरे लगाए जाते हैं। वर्ष में एक बार दिसम्बर से फरवरी के बीच इन कैमरों की मदद से बाघों की तस्वीर ली जाती है। बिहार वाल्मीकि टाइगर रिजर्व में दो डिवीजन में बंटा है। काफी लंबा एरिया होने के कारण इसे दो डिवीजन में बांटा गया है। एक डिवीजन में 400 से 500 कैमरे लगाए जाते हैं। 45 दिन बाद इन कैमरों को खोलकर दूसरे डिवीजन में लगाकर तस्वीर ली जाती है।

