#MUZAFFARPUR #BIHAR #INDIA : आज जिला परिषद सभागार में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत पी सी एन्ड पी एन डी टी एक्ट पर सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें चिकित्सकों, नर्सिंग होम एवं अल्ट्रा साउंड के प्रबंधकों ने भाग लिया कार्यक्रम का उदघाटन सिविल सर्जन, जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, के द्वारा किया किया गया। कार्यक्रम के उद्देश्य पर चर्चा करते हुए जिला प्रोग्राम पदाधिकारी ने कहा कि गिरता लिंगानुपात दर्शाता है की समाज में बालिका जन्म की दर कम है।

मुजफ्फरपुर जिले का लिंगानुपात बिहार के लिंगानुपात से कम है। जरूरत है कि गर्भाधान के बाद लिंग परीक्षण की कोशिश को रोका जाये। आप सभी चिकित्सक इसमें महत्वपूर्ण भुमिका निभा सकते हैं। इस अधिनियम का अनुपालन करें तथा लिंग परीक्षण करनवने वाले की शिकायत करें। वरिष्ठ चिकित्सक बी बी ठाकुर ने कहा कि यह हमारी नैतिक ज़िम्मेदारी है कि एक्ट के प्रावधानों के अनुरूप अपना काम करें। बेटी बचेगी तभी हम बचेगें। अधिनियम पर गुणनांद चौधरी,विकास कुमार, अपर मुख्या चिकित्सा पदाधिकारी , सदर अस्पताल की महिला चिकित्सक डाक्टर अँजुम आरा ने चर्चा की।

विशेषज्ञों ने बताया की आदर्श स्थिति में 1000पुरुषों पर 1000 महिलाएं होनी चाहिए,परंतु जब लिंगानुपात 954 से कम होने पर चिंता की बात है। यह अधिनियम 2003 से अस्तित्व में आया। इस अधिनियम के पूर्व आई पी सी की धारा 315,316 के तहत गर्भ की जांच एक क्रिमिनल अपराध था। पी सी ऐंड पी एन डी टी एक्ट के तहत अपराधी गर्भ धारण के पश्चात लिंग चयन को गैर जमानती अपराध माना गया। एक्ट के क्रियान्वयन हेतु केंद्र,राज्य एवं जिला स्तर पर पर्यवेक्षण बोर्ड का गठन किया गया है। जिला स्तर पर अपर मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी को नोडल पदाधिकारी सलाहकार समिति बनाया गया है जिसमें सरकारी अधिवक्ता, महिला संगठन की सदस्या, सिविल सोसायटी, डायग्नोस्टिक सेंटर के प्रतिनिधि सदस्य हैं।

बताया गया की प्रत्येक अल्ट्रा साउंड सेंटर पर अधिनियम से सम्बंधत किताब रखनी एवं जांच से सम्बंधित 18 कालम वाले फ़ार्म एफ को भरना अनिवार्य है, ऐसा नहीं करना अधिनियम की धारा 5(2) के तहत अपराध है। सिविल सर्जन ने सभी से अपील की की जिले में लिंगानुपात में सुधार लाने के लिए आप का सहयोग चाहिए। बेटी बचेगी तभी हम एक स्वास्थ एवं सभ्य समाज एवं सशक्त राज्य का निर्माण कर सकते है।